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मां के कहने पर बनीं शूटर, 2007 में शुरू हुआ करियर

3 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को सिल्वर मेडल दिलाने वाली अंजुम स्कूल में कई गेम्स की चैंपियन रहीं हैं लेकिन शूटिंग उन्होंने 2007 में ही शुरू की। उनके हाथ में पहली बार गन उनकी मां शुभ मौदगिल ने थमाई। खुद एनसीसी की शूटर रहीं शुभ ने बेटी किसी से उधार ली पिस्टल से निशाना लगाना सिखाया। अंजुम में कुछ खास ही था क्योंकि उन्होंने 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद ही स्टेट में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पिस्टल ली और कंपीटिशन करना शुरू किया। अंजुम ने शूटिंग शुरू करने के बाद एनसीसी जॉइन की और ट्रेनिंग जारी रखी। उस समय एनसीसी चंडीगढ़ के कमांडर कर्नल एमएस चौहान थे जिन्होंने जर्मनी से मंगवाई राइफल से अंजुम को निशाना लगाने की सलाह दी। इसके बाद अंजुम ने पलटकर नहीं देखा आैर हर नेशनल में हिस्सा लेते हुए मेडल पर निशाना लगाया। 2013 में उन्होंने ओलंपियन शूटर अंजली भागवत को भी हराया।

गन के साथ ड्राइंग किट भी रहती है
अंजुम कंपीटिशन के दौरान और घर पर पेंटिंग करके खुद को रिफ्रेश रखती हैं। अंजुम के बैग में उनकी राइफल के साथ-साथ ड्रांइग के लिए पेंसिल और ब्रश हमेशा रहते हैं। इंस्टाग्राम अकाउंट पर अंजुम अपने पेंटिग्स की फोटो हमेशा लगाती रहती हैं, बुद्ध की पेंटिंग में उन्हें खासी महारत हासिल है। उनकी पेंटिंग्स कई लोग खरीदते भी हैं और वो बतौर तोहफे में भी देती हैं।

पढ़ाई में भी एक्सपर्ट
अंजुम शूटिंग के साथ-साथ पढ़ाई में भी आगे हैं। अंजुम को प्रमोट करने वाले डीएवी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमलेेंद्र मान ने कहा कि अंजुम की पढ़ाई के साथ शूटिंग लगातार जारी रही। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज से ही स्पोर्ट्स साइकॉलोजी में मास्टर डिग्री हासिल की। वे हमेशा दोनों में बैलेंस रखती हैं। स्कूल से ही वो गेम्स और स्टडीज में आगे रही हैं।

शूटर रही हैं मां भी
अंजुम को शूटिंग करने के पहले टिप्स अपनी मां शुभ से ही मिले थे। शुभ मौदगिल भी एनसीसी की शूटर रही हैं और उन्होंने 1983 में बेस्ट शूटर का टाइटल भी हासिल किया था। इसके अलाव वे पंजाब यूनिवर्सिटी से भी खेलीं। शुभ ने इसके अलावा जिम्नास्टिक में तीन नेशनल खेले और वॉलीबॉल भी खेला। मां की ही तरह अंजुम भी शूटिंग के अलावा थ्रो बॉल में नेशनल खेली हैं।

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