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ऑर्गन्स के इंतजार में 90 परसेंट लोग वेटिंग लिस्ट में क्यों मरें: हाईकोर्ट
ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से स्टेट और सेंट्रल लेवल ट्रांसप्लांटेशन का पूरा डाटा दिए जाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस अजय कुमार मित्तल व जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने पीजीआई से पूछा है कि उनके यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन की क्या सुविधाएं हैं और अब तक कितने पेशेंट एडमिट कर उनके आॅपरेशन किए गए। पाॅलिसी बनाए जाने और इस काम के लिए अस्पताल बनाए जाने की मांग संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि ऐसा क्यों है कि अंगों के इंतजार में 90 फीसदी लोग वेटिंग लिस्ट में ही मर जाते हैं।
इस संबंध में हाईकोर्ट के वकील रंजन लखनपाल व एक अन्य याचिका में कहा गया कि हाल ही में उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट करवाया और इस दौरान पाया कि किसी व्यक्ति को अंग की जरूरत है तो उसे भाग्य पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में सिर्फ पीजीआई ही ऐसा संस्थान है, जहां अंगों का ट्रांसप्लांट संभव है, लेकिन यहां डाॅक्टरों की कमी है और ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक उपकरण व डोनर को रखने के लिए उचित व्यवस्था भी नहीं है। याची ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिस प्रकार की व्यवस्था है, उसी का नतीजा है कि ट्रांसप्लांट के सहारे पूरे देश के मुकाबले अकेले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट होते हैं। तमिलनाडु सरकार ने इसके लिए पूरी व्यवस्था की है। याची ने कहा कि हर साल एक्सीडेंट में 70 हजार लोगों की मौत हो जाती है। यदि इन लोगों के परिजनों की काउंसलिंग की जाए तो इनमें से प्रत्येक के अंगों को दान कर 9 लोगों को जीवन दिया जा सकता है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि अंग दान की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए और साथ ही अंग अलॉट करने की स्थितियों को भी स्पष्ट किया जाए ताकि अंग देकर किसी का अनमोल जीवन बचाया जा सके। इसके साथ ही हरियाणा और पंजाब में ऐसे हॉस्पिटल स्थापित किए जाएं जहां अंगों का प्रत्यारोपण किया जा सके। हर अस्पताल में नोडल ऑफिसर की नियुक्ति हो और साथ ही अंगों का पूरा ब्यौरा नेशनल लेवल पर तैयार हो ताकि आवश्यकता के समय इस पूल से अंग उपलब्ध करवाए जा सकें।
हर साल 1 लाख को लीवर की जरूरत, मिलता है 1 हजार को
याचिका में कहा गया कि देश में हर वर्ष 1.75 लाख लोगों को किडनी की जरूरत पड़ती है लेकिन महज पांच हजार लोगों को ही किडनी मिलती है। लीवर की जरूरत हर वर्ष करीब 1 लाख लोगों को होती है लेकिन इनमें से केवल 1 हजार ही ऐसे लोग होते हैं जिन्हें यह सही समय पर यह मिल पाती है। दिल के मामले में भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। हर साल करीब 50 हजार लोगों को हार्ट ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत होती है लेकिन केवल 10 हजार को ही मिल पाता है।