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कोर्स पूरा नहीं करवाया, इंस्टीट्यूट पर 50 हजार हर्जाना

3 वर्ष पहले
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डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम ने सेक्टर-34 के ओएक्सएल स्कूल ऑफ मल्टीमीडिया को 50 हजार रुपए हर्जाना अदा करने के निर्देश दिए हैं। फोरम ने खुड्‌डा अलीशेर के महेश कुमार की शिकायत पर ये फैसला सुनाया है। इंस्टीट्यूट ने महेश से कोर्स की पूरी फीस तो ले ली लेकिन कोर्स पूरा नहीं करवाया। यहां तक कि सेकेंड ईयर का रिजल्ट भी अभी तक डिक्लेयर नहीं किया। महेश कुमार ने फोरम को दी शिकायत में बताया था कि उन्होंने ओएक्सएल स्कूल ऑफ मल्टीमीडिया में 7 जून 2012 को बेचलर ऑफ साइंसेज इन मल्टीमीडिया कोर्स में एडमिशन ली थी। तीन साल के इस कोर्स के लिए उन्होंने 2 लाख 70 हजार रुपए जमा करवाए। ये फीस उन्होंने इंस्टॉलमेंट में जमा करवाई। उन्हें बताया गया था कि ये इंस्टीट्यूट पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी जालंधर से एफिलिएटेड है।

पहले साल में यूनिवर्सिटी चेंज की: एडवोकेट विशाल गुप्ता और अंकित गुप्ता ने बताया कि बताया कि महेश को पहले सेमेस्टर के एग्जाम के दौरान कहा गया था कि पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी का हाईकोर्ट दिल्ली में केस चल रहा है जिस कारण उन्हें डिग्री नहीं दी जाएगी। इसलिए उन्हें उनका कोर्स कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी (केएसओयू), मैसूर के साथ बदलने के लिए पूछा गया। स्टूडेंट्स के पास कोई ऑप्शन नहीं बचा था तो उन्होंने यूनिवर्सिटी बदलने के लिए एग्रीमेंट कर लिया जिसके लिए उनसे 10 हजार रुपए भी चार्ज किए गए।

सेक्टर-34 के ओएक्सएल स्कूल ऑफ मल्टीमीडिया के खिलाफ कंज्यूमर फोरम का फैसला

दूसरे साल का रिजल्ट ही नहीं आया...महेश ने बताया कि इसके बाद भी सेकेंड ईयर में उन्हें और बाकी स्टूडेंट्स को एग्जाम के लिए इंतजार करवाया गया। स्टूडेंट्स ने काफी प्रोटेस्ट किया और मामला पुलिस तक पहुंच गया। इस दौरान इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ने कहा कि वे जल्द ही एग्जाम करवा देंगे। इसके बाद इंस्टीट्यूट ने दिसंबर 2014 में सेकेंड ईयर के एग्जाम करवा दिए लेकिन अभी तक उसका रिजल्ट डिक्लेयर नहीं किया।

तीन साल का कोर्स अभी तक खत्म नहीं...महेश ने बताया कि तीन साल का कोर्स 2015 में खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक उनका सेकेंड ईयर का रिजल्ट ही नहीं निकाला। महेश ने बताया कि उन्होंने जब केएसओयू की वेबसाइट चेक की तो पता चला कि उनके पास ऐसा कोई कोर्स ही नहीं है। उन्होंने और जानकारी हासिल की तो पता चला कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने तो केएसओयू को डिस्टेंस लर्निंग मोड से डी-रिकोग्नाइज्ड कर दिया है। उन्होंने इस बारे में इंस्टीट्यूट से बात की लेकिन कोई हल नहीं निकला जिसके बाद उन्होंने इंस्टीट्यूट के खिलाफ कंज्यूमर फोरम में शिकायत दी।

इंस्टीट्यूट का जवाब...इंस्टीट्यूट ने फोरम में जवाब दिया कि स्टूडेंट्स ने उन्हें खुद यूनिवर्सिटी चेंज करने के लिए कहा था जिसके लिए उन्होंने फीस ली थी जो उन्होंने आगे जमा करवा दी थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कंज्यूमर फोरम में इंस्टीट्यूट को डेढ़ लाख रुपए लौटाने के साथ-साथ 50 हजार रुपए हर्जाना और 8 हजार रुपए मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए।

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