महिलाओं के चेहरे पर झुर्रियां हो जाएं, तो उन्हें परेशानी हो जाती है। लेकिन, अब स्टेम सेल थेरेपी से इन झुर्रियों को खत्म किया जा सकता है। बॉडी से फैट निकालकर उससे नैनो फैट बनाकर, उसे स्टेम सेल में तब्दील कर जहां-जहां झुर्रियां होती है। वहां, उसे इंजेक्ट कर दिया जाता है। इससे झुर्रियां ठीक हो जाती हैं। इसके अलावा स्टेमसेल पर आधारित क्रीम भी विकसित हो रही हैं, जो शरीर के किसी भी हिस्से की झुर्रियों को ठीक करने में कारगर सिद्ध हो रही है।
यह बात सोसायटी ऑफ रिजनरेटिव ऐस्थेटिक एंड फंक्शनल मेडिसिन के प्रेसिडेंट डॉ. प्रभु मिश्रा ने दो दिवसीय इंटरनेशनल रिजनरेटिव मेडिसिन कॉन्क्लेव के दौरान कही। डॉ. प्रभु मिश्रा ने यह भी बताया कि स्टेम सेल थेरेपी वैसे तो कोई नई चीज नहीं है। लेकिन, इसमें हो रही नई रिसर्च से लोगों को ताउम्र दवाओं से छुटकारा मिल रहा है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि बोन मैरो या बॉडी के फेट से स्टेमसेल निकलकर, उसे पैंक्रियाज में इंजेक्ट कर दिया जाता है। इससे डायबिटीज पूरी तरह से तो ठीक नहीं होती, लेकिन पैंक्रियाज की कोशिकाएं रीजनरेट हो जाती हैं। इससे जो मरीज इंसुलिन ले रहे हैं, वह टेबलेट लेकर क्वालिटी लाइफ जी सकते हैं। इसी तरह से ऑटो इम्यून डिजीज भी इसके जरिए ठीक की जा रही है। इसमें अपना ही इम्यून सिस्टम काम करना बंद कर देता है। इस तरह की बीमारियां थेरेपी से ठीक की जा रही हैं। मल्टीपल एस्कोलोरोसिस यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होती है। इसका कोई इलाज नहीं है। इसमें नर्व और मसल्स के बीच कोआॅर्डिनेशन खत्म हो जात है। धीरे-धीरे आवाज चली जाती है। इसमें पेशेंट के बोन मेरो और फैट से स्टेम सेल निकालते हैं, स्टेमसेल बनाकर उसे उसके मसल्स में इंजेक्ट करते हैं, इससे मसल्स दोबारा रीजनरेट होना शुरू हो जाती है। बॉडी के सेल री जनरेट होने से मरीज जल्द ही ठीक होने लगता है।
डायबिटीज पेशेंट इंसुलिन से टेबलेट पर आ जाता है