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बायोमेडिकल डिवाइसेस लोगों को सस्ते मिले, इसलिए काम करेंगे इंस्टीट्यूट्स

3 वर्ष पहले
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पीयू, पीजीआई, इमटेक सहित चंडीगढ़ व आसपास के सभी इंस्टीट्यूट्स बायोमेडिकल डिवाइसेस को तैयार करने के लिए काम करेंगे। फिलहाल यह काम आंध्र प्रदेश में लगने वाली इंडस्ट्री के लिए करेंगे जिसमें सरकार ने मदद उपलब्ध करवाई है।

300 एकड़ जमीन पर यह इंडस्ट्री लगने जा रही है और कुछ इंडस्ट्री पहले से ही इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है। चंडीगढ़ इनोवेशन कॉरिडोर के नाम से शुरू हो रहे इस प्रोजेक्ट की शुरुआत सोमवार को पीयू के वाइस चांसलर प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर और एमिट्ज के सीईओ डॉ. जितेंद्र कुमार ने की। जितेंद्र विशाखापट्टनम से वीडियो कॉलिंग पर पीयू में बैठे साइंटिस्ट, इंडस्ट्रियलिस्ट्स और एक्सपर्ट्स से भी रू-ब-रू हुए। उन्होंने कहा कि इससे बाजार में भारतीय लोगों को सस्ते बायोमेडिकल प्रोडक्ट मिलने चाहिए। इस प्रोजेक्ट का रिसर्च एंड इनोवेशन का हिस्सा चंडीगढ़ के इंस्टीट्यूट को देखना है।

80% बायोमेडिकल डिवाइस अभी विदेश से आते हैं

इस मौके पर मौजूद नीति आयोग मैं मेडिकल के एक्सपर्ट डॉ. विनोद पॉल ने कहा कि एमिट्ज, कलाम इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ टेक्नोलॉजी और क्रिक का यह करार देश के लिए फायदेमंद होना चाहिए। इस समय छोटे-बड़े लगभग 80% बायोमेडिकल डिवाइसेस विदेशों से आते हैं। यदि यहां पर इनको तैयार करें और यही पर इनकी इंडस्ट्री लगे तो ये सस्ते मिलेंगे। को-ऑर्डिनेटर प्रो. रुपिंदर तिवारी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में आगे चलकर देश के बाकी हिस्सों उसको भी जोड़ा जाएगा। उनका सेंटर पहले क्रिक के बाकी संस्थानों के साथ एमिट्ज का एमओयू कराएगा। उनके सेंटर के साथ एमओयू पिछले साल की साइन हो चुका है।

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