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प्रशासन का पीयू के मेंटेनेंस का खर्चा उठाने से इनकार

3 वर्ष पहले
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में फंड की कमी के मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान पीयू ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कहा कि यूनिवर्सिटी के गवर्निंग स्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत है। रजिस्ट्रार जीएस चड्डा की तरफ से दाखिल एफिडेविट में कहा गया कि सीनेट में गंभीर मामलों पर भी ईमानदारी से चर्चा नहीं हो पा रही है। रिकोग्नाइज्ड ग्रुप सीनेट की बैठक में हिस्सा ही नहीं ले रहे हैं। सीनेट में मौजूद मेंबर्स अहम मामलों पर भी अपने मन मुताबिक कार्रवाई का समर्थन करते हैं। एफिडेविट में कहा गया कि पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने भी गृह मंत्रालय को पीयू गवर्नेंस में सुधारों पर नौ सितंबर 2016 को पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने एफिडेविट को रिकाॅर्ड पर लेते हुए पंजाब सरकार को पीयू को दी जाने वाली पांच करोड़ रुपए की राशि इलेक्ट्राॅनिकली ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले पर 15 मई के लिए सुनवाई तय की है।

यह है मामला: पीयू के वाइस चांसलर प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर के सीनेट में दिए बयान पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया है। सीनेट ने पीयू का 502.11 करोड़ का रिवाइज्ड बजट पास कर दिया। पीयू प्रशासन केंद्र सरकार से इस साल के 277 करोड़ के घाटे को पूरा करने के लिए रिवाइज्ड बजट में ये पैसा मांगा। पीयू सीनेट में रिवाइज्ड बजट पास करने के साथ ही वाइस चांसलर प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर बाेले कि अगर केंद्र से ये रिवाइज्ड बजट नहीं मिला तो पीयू बंद हो जाएगी।

‘पीयू का अपना इंजीनियरिंग विंग’

पीयू के रख-रखाव के खर्च पर मांगे गए जवाब में हाईकोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि पीयू की मेंटनेंस के काम की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट नहीं ले सकता। पिछले साल जुलाई और अगस्त में जारी पत्रों का हवाला देते हुए सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर ने कोर्ट में कहा कि मेंटनेंस वर्क पीयू का इंजीनियरिंग विंग अपने स्तर पर कर रहा है। इससे पहले चंडीगढ़ नगर निगम पीयू के देखरेख का खर्च उठाने से इंकार कर चुका है।

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