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5 सालों में एयर क्वालिटी हुई खराब, अब सुधारने को बनेगा मैनेजमेंट प्लान

3 वर्ष पहले
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रेस्पीरेबल सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर्स (आरएसपीएम) परमिशेबल लिमिट है 60 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर

इसी प्लानिंग को लेकर आज होगी काॅन्फ्रेंस, पंचकूला-मोहाली में भी होगा काम

एमसी, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट बाकी डिपार्टमेंट्स के साथ मिलकर करेंगे काम

सिटी रिपोर्टर| चंडीगढ़

पिछले पांच साल से चंडीगढ़ की हवा लगातार खराब हो रही है। यहां की हवा में पर्टिकुलेट मैटर्स (पीएम10) का लेवल सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के तय स्टैंडर्ड से ज्यादा रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ एन्वायर्नमेंट एंड फॉरेस्ट ने 94 ऐसे शहरों की लिस्ट जारी की है, जहां पीएम10 या रेस्पिरेबल सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर्स (आरएसपीएम) या एयर पॉल्यूशन लगातार बढ़ रहा है। इस लिस्ट में चंडीगढ़ का नाम भी शामिल है। अब चंडीगढ़ प्रशासन एक एयर क्वालिटी मैनेजमेंट प्लान बनाएगा जिससे ये तय किया जाएगा कि आगे फ्यूचर में एयर क्वालिटी को साफ रखने के लिए क्या क्या काम करने हैं। इसके लिए बुधवार को एक सिटी कंसल्टेशन प्रोग्राम चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के लिए किया जा रहा है। इसमें चंडीगढ़ की तरफ से एमसी, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट व बाकी उन सभी डिपार्टमेंट्स के अफसर शामिल होंगे जो एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को लेकर काम करेंगे।

ये शामिल होंगे चंडीगढ़ की हवा साफ करने के प्लान में: मॉनिटरिंग नेटवर्क को मजबूत करना (इसमें सेंसर बेस्ड मॉनिटरिंग सेंटर और बनेंगे), एयर पॉल्यूशन हेल्थ इंपेक्ट स्टडीज, एयर इन्फॉर्मेशन सिस्टम, सर्टिफिकेशन आॅफ मॉनिटरिंग इंस्टीट्यूशन, एयर क्वालिटी फॉर कास्टिंग सिस्टम, अवेयरनेस एंड कैपेसिटी बिल्डिंग ड्राइव और उन इंडस्ट्री या कार्यों पर सख्ती करना जिनमें एयर पॉल्यूशन ज्यादा होता है। आईआईटी से स्टडी करवाई जाएगी, गाड़ियां जो ज्यादा पॉल्यूशन कर रही हैं उनको बंद किया जाएगा। सभी पॉल्यूशन चेक सेंटरों को ऑनलाइन सर्वर के साथ जोड़ा जाएगा और जिस गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं होगा उसको मैसेज और ईमेल के जरिए जानकारी भेजी जाएगी।

पंचकूला-मोहाली के अफसर भी होंगे शामिल: चंडीगढ़ में एयर क्वालिटी तभी साफ हो सकती है जब पंचकूला और मोहाली भी इसके लिए साथ दें। इसलिए बुधवार को होने वाली काॅन्फ्रेंस में इन दोनों शहरों के अफसर भी हिस्सा ले रहे हैं। मिनिस्ट्री की तरफ से भी चंडीगढ़ को एयर क्लीन करने को लेकर एक्शन प्लान तैयार करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसमें पहले तीन साल में 35% एयर पॉल्यूशन घटाने का टारगेट रखा गया गया है।

चंडीगढ़ में प्रमुख कारण गाड़ियां: जितनी पॉपूलेशन चंडीगढ़ की है उससे ज्यादा गाड़ियां रजिस्टर्ड हो चुकी हैं। हर दो महीनों में 9999 नई गाड़ियां रजिस्टर्ड हो रही हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2018 तक करीब 11.32 लाख वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं।

प्रशासन की अपनी रिपोर्ट में 2017 में एवरेज एयर पॉल्यूशन बढ़ा

पांच एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन से हाल ये रहा...

सेक्टर-17 में 101 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर

इंडस्ट्रियल एरिया में 118

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में 99

इमटेक-39 में 113

कैंबवाला में 106 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर।

यानि:- एवरेज 2017 में परमिशेबल लिमिट से 40-45 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर ज्यादा लेवल आरएसपीएम का रहा।

पर्टिकुलेट मैटर्स (पीएम 2.5): परमिशेबल लिमिट है 40 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर

पांच एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन में ये हाल रहा

सेक्टर-17 में 58 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर

इंडस्ट्रियल एरिया में 68

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में 57

इमटेक-39 में 65

कैंबवाला में 61 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर।

यानि:- एवरेज 20 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर लेवल पीएम 2.5 का ज्यादा रहा।

जिसकी वजह से चंडीगढ़ 94 शहरों में शामिल उस पीएम10 का लेवल इतना रहा चंडीगढ़ में

तय स्टैंडर्ड 100 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर (यूजी/एम3) है

13 दिसंबर पीएम10-224

19 नवंबर पीएम10- 308

15 नवंबर पीएम 10- 132

14 नवंबर पीएम10- 197

13 नवंबर पीएम 10- 137

12 दिसंबर पीएम10- 231

11 नवंबर पीएम 10- 190

10 नवंबर पीएम 10- 188

8 नवंबर पीएम10- 357

6 नवंबर पीएम10- 261

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