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अब एग्जामिनेशन को-ऑर्डिनेटर दे सकेगा राइटर की इजाजत

3 वर्ष पहले
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पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस, इससे एफिलिएटेड कॉलेजों, ओपन लर्निंग और प्राइवेट कैंडिडेट्स को यदि जरूरत पड़े तो राइटर की इजाजत एग्जामिनेशन को-ऑर्डिनेटर ही दे सकेगा। इसके लिए प्रायर इंफॉर्मेशन या प्रायर परमिशन की शर्त भी खत्म कर दी गई है। वीरवार को यूनिवर्सिटी ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यूनिवर्सिटी से हर समेस्टर में करीब तीन लाख स्टूडेंट्स एग्जाम देते हैं, जिनको इससे लाभ पहुंचेगा। इकवाल अपॉर्चुनिटी सेल फॉर पर्सन विद डिसेबिलिटी इसके लिए कोशिश कर रहा था। सेल के को-ऑर्डिनेटर डॉ. संजीव गौतम ने इस नोटिफिकेशन की पुष्टि की है। इसमें अब एजुकेशन की शर्त भी खत्म कर दी गई है। पहले हायर एजुकेशन वाले राइटर को इजाजत नहीं दी जाती थी।

ये हैं नए नियम:पीयू के ब्लाइंड, स्पेशली एबल्ड स्टूडेंट को पहले डिपार्टमेंट के चेयरपर्सन, फिर कंट्रोलर एग्जामिनेशन से प्रायर परमिशन लेनी पड़ती थी कि उनको किसी राइटर की जरूरत है। इसके लिए अलग से फीस भी अदा करनी पड़ती थी। ऐसे में दिक्कत आती थी कि ओपन स्कूल वाले स्टूडेंट्स को कई सौ किलोमीटर का सफर करके पहले चेयरपर्सन की इजाजत लेनी पड़ती थी। प्राइवेट स्टूडेंट को तो यह सुविधा मिल नहीं पाती थी क्योंकि ज्यादातर को पता ही नहीं कि चेयरपर्सन कौन है। चेयरपर्सन के बाद कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन की इजाजत भी जरूरी होती थी। लेकिन अब उनको यह परेशानी नहीं होगी। सेंटर को-ऑर्डिनेटर ही उनके सारे प्रूफ ले लेगा और उसके बाद उसे कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन तक भेज दिया जाएगा।

स्टूडेंट्स के लाभ के लिए नया नोटिफिकेश्न

पीयू के सीओई प्रो. परविंदर सिंह का कहना है कि हमने पहले भी नियम में कुछ बदलाव किए थे, लेकिन कुछ प्राइवेट स्टूडेंट आए और उन्होंने बताया कि उनको इस नियम का फायदा नहीं मिल पा रहा। सभी स्टूडेंट्स को इस नियम का लाभ देने के लिए अब एक बार फिर नया नोटिफिकेशन किया गया है, जिसमें एग्जामिनेशन को-ऑर्डिनेटर ही अपने स्तर पर साइन करके यह इजाजत दे सकता है।

आसपास ऐसे किस्से देख कर ही यह मुद्दा उठाया...

स्टूडेंट मनीष चौहान का कहना है कि समस्या उस समय ज्यादा खड़ी होती थी जब मौके पर एक राइटर मना कर दे और दूसरे की अप्रूवल लेनी हो। इसलिए नियम में बदलाव जरूरी भी था। अपने आसपास ऐसे किस्से देख कर ही हमने यह मुद्दा उठाया था।

एजुकेशन रिपोर्टर | चंडीगढ़

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस, इससे एफिलिएटेड कॉलेजों, ओपन लर्निंग और प्राइवेट कैंडिडेट्स को यदि जरूरत पड़े तो राइटर की इजाजत एग्जामिनेशन को-ऑर्डिनेटर ही दे सकेगा। इसके लिए प्रायर इंफॉर्मेशन या प्रायर परमिशन की शर्त भी खत्म कर दी गई है। वीरवार को यूनिवर्सिटी ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यूनिवर्सिटी से हर समेस्टर में करीब तीन लाख स्टूडेंट्स एग्जाम देते हैं, जिनको इससे लाभ पहुंचेगा। इकवाल अपॉर्चुनिटी सेल फॉर पर्सन विद डिसेबिलिटी इसके लिए कोशिश कर रहा था। सेल के को-ऑर्डिनेटर डॉ. संजीव गौतम ने इस नोटिफिकेशन की पुष्टि की है। इसमें अब एजुकेशन की शर्त भी खत्म कर दी गई है। पहले हायर एजुकेशन वाले राइटर को इजाजत नहीं दी जाती थी।

ये हैं नए नियम:पीयू के ब्लाइंड, स्पेशली एबल्ड स्टूडेंट को पहले डिपार्टमेंट के चेयरपर्सन, फिर कंट्रोलर एग्जामिनेशन से प्रायर परमिशन लेनी पड़ती थी कि उनको किसी राइटर की जरूरत है। इसके लिए अलग से फीस भी अदा करनी पड़ती थी। ऐसे में दिक्कत आती थी कि ओपन स्कूल वाले स्टूडेंट्स को कई सौ किलोमीटर का सफर करके पहले चेयरपर्सन की इजाजत लेनी पड़ती थी। प्राइवेट स्टूडेंट को तो यह सुविधा मिल नहीं पाती थी क्योंकि ज्यादातर को पता ही नहीं कि चेयरपर्सन कौन है। चेयरपर्सन के बाद कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन की इजाजत भी जरूरी होती थी। लेकिन अब उनको यह परेशानी नहीं होगी। सेंटर को-ऑर्डिनेटर ही उनके सारे प्रूफ ले लेगा और उसके बाद उसे कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन तक भेज दिया जाएगा।

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