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पीयू वीसी के एफिडेविट को वापस देने की मांग की रजिस्ट्रार ने, ग्राेवर बोले- मैं अपने स्टैंड पर कायम

3 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ | पीयू में फंड की कमी के मामले पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान पीयू की तरफ से रजिस्ट्रार ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर गवर्निंग स्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत को लेकर वीसी अरुण ग्रोवर की तरफ से दिए गए एफिडेविट को वापस लिए जाने की मांग की। दूसरी तरफ वीसी ने एफिडेविट वापस लेने से इंकार करते हुए कहा कि वे अपने स्टैंड पर कायम हैं। कोर्ट ने पीयू की अर्जी पर सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट के सामने वीसी ने कहा कि पीयू को वे लोग कंट्रोल कर रहे हैं, जिनका यूनिवर्सिटी से कुछ लेना-देना नहीं है। रही बात टीचर्स की तो कामकाज में उनका दखल बहुत कम है। पीयू सीनेट में चुने जाने के लिए महज दो से तीन हजार वोटों की जरूरत है। फैकल्टी के कुल वोट 796 हैं, जबकि टीचर्स के वोट सिर्फ 233। पंजाब सरकार की तरफ से कोर्ट को जानकारी दी गई कि उन्होंने अपने हिस्से की 6.10 करोड़ रुपए की ग्रांट पीयू को ट्रांसफर कर दी है। बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला जनहित से जुड़ा है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष का कोई निजी हित शामिल नहीं है। सुनवाई के चलते मंगलवार को वीसी ग्रोवर और रजिस्ट्रार कर्नल जीएस चड्डा एक साथ हाईकोर्ट पहुंचे और फिर एक ही कार में एकसाथ वापस लौटे।

मामला जनहित से जुड़ा, किसी का निजी हित इसमें शामिल नहीं: हाईकोर्ट

वीसी ने एक और एफिडेविट दिया...

वीसी ने गवर्निंग स्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत को लेकर दिए एफिडेविट पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए एक और एफिडेविट मंगलवार को दायर किया। कहा गया कि वीसी की जिम्मेदारी है कि वे यूनिवर्सिटी में सुधार की जरूरतों पर सही जानकारी कोर्ट के रिकाॅर्ड पर दें। यही कारण है कि पीयू के रजिस्ट्रार की तरफ से एफिडेविट न देकर उन्होंने अपनी तरफ से इसे कोर्ट में दायर किया। एफिडेविट में उनके निजी विचार हैं जिनकी जानकारी कोर्ट को दी गई। यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है।

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