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पीयू में आग लगने के एक साल बाद भी नहीं आई फाइनल रिपोर्ट

3 वर्ष पहले
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पंजाब यूनिवर्सिटी के एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में आग लगने की घटना को एक साल पूरा हो चुका है लेकिन अब तक इस बारे में फाइनल रिपोर्ट सबमिट नहीं की गई है। अकाउंट सेक्शन में लगी आग में करीब 568 मुलाजिमों की सर्विस बुक जल गई थी जिनमें से 102 सर्विस बुक का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। 14 मई, 2017 की अलसुबह लगी आग के बारे में जस्टिस नारंग कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट 2 सितंबर में ही सौंप दी थी, लेकिन फाइनल रिपोर्ट अब तक सबमिट नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी प्रवक्ता रेणुका बांका सलवान ने कहा कि कमेटी ने फाइनल रिपोर्ट देने के लिए एक्सटेंशन मांगी है। अब तक लगभग सारा नष्ट हुआ डाटा रिट्रीव किया जा चुका है और स्ट्रक्चर की मजबूती का काम भी 80 फीसदी पूरा है। स्ट्रक्चर पर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की के पास थी। यूनिवर्सिटी में आग लगने के बाद जस्टिस जेएस नारंग, डॉ. आरएस वर्मा और पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. परमजीत सिंह वाली फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया था। अंतरिम रिपोर्ट में लिखा गया था कि जो भी डाटा यूनिवर्सिटी में आग लगने से खोया है, वह 70 फीसदी मिल गया है और 85 फीसदी तक मिल सकता है। 44 पेज की इस रिपोर्ट में लिखा गया था कि आग लगने में किसी इम्प्लॉइज या आउटसाइडर का हाथ नहीं लगता। इस बारे में आई सीएफएसएल की रिपोर्ट भी सीनेट में 24 सितंबर, 2017 को रखी गई थी, इसमें कहा गया था कि सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहे थे, यूनिवर्सिटी का आग बुझाने वाला सिस्टम भी कारगर नहीं था और गार्ड का काम भी ठीक से नहीं हो रहा था। यूनिवर्सिटी ऐसे हादसों से निपटने के लिए कतई तैयार नहीं है। इस 11 पेज की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को उसकी कई खामियां बताई गई थी। यूनिवर्सिटी से रिटायर प्रो. विजय चोपड़ा ने इस आग की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई थी। उनका आरोप था कि यह यूनिवर्सिटी में हुए पूजा बग्गा केस और अन्य गड़बडिय़ों को छुपाने के लिए सिर्फ अकाउंट सेक्शन नहीं लगाई गई थी।

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