नींद की तरह ध्यान से भी हमें जैव-रासायनिक संतुलन प्राप्त होता है, जिससे हम भीतर व बाहर के सारे युद्धों में विजयी होने की क्षमता रखते हैं। ध्यान हमें मन को शांत तथा मौन रखते हुए सफलता का शिखर छूने में मदद करता है। मौन के बिना सफलता वैसी ही है, जैसे गंध के बिना कोई फूल। अतीत के प्रति असंतोष, वर्तमान से मोहभंग तथा भविष्य के प्रति अविश्वास के फलस्वरूप हममें असुरक्षा का बोध उपजता है। हमें अतीत से सीखना, वर्तमान का आनंद लेना और भविष्य के लिए योजना बनाना चाहिए। ये प्रवचन मुनि विनय कुमार आलोक ने सेक्टर 24 में अणुव्रत भवन में दिए। जो मन लगातार योजना बनाता रहता है और आराम नहीं करता, वह विकृति को प्राप्त करने की प्रबल संभावना रखता है।