पुरुषोतम मास में आलस का परित्याग करके व्यक्ति को सत्कर्म में जुट जाना चाहिए क्योंकि ऐसा अवसर बार-बार नहीं मिलता। आलसी व्यक्ति को इस जीवन में न ही विद्या प्राप्त होती है और न ही धन। उद्यम करने से ही कार्य सिद्ध होते हैं मनोरथ में नहीं ।
शेर भी अालस का त्याग करके व परिश्रम करके अपना शिकार करता है। ये प्रवचन ईश्वर चंद्र शास्त्री ने पुरुषोतम मास कथा में दिए। इस कथा का आयोजन प्राचीन खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर 28 डी में रोजाना शाम 6 से 7 बजे तक किया जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में भी आलस व प्रमाद का त्याग कर कर्म करने पर बल दिया। व्यक्ति को आध्यात्मिक या भौतिक किसी भी क्षेत्र में सफलता तभी मिलती है जब वह आलस का त्याग करके परिश्रम करेगा। इस पुरुषोतम मास में ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए और नियमों का पालन करते हुए भजन ध्यान करंे। इस मास में जल दान अन्न दान पुस्तक दान तीर्थ स्नान, मंत्र जाप करना, कथा श्रवण करने की महिमा बताई गई है। आलस और प्रमाद जन्म व जीवन को बिगाड़ देते हैं अत: अपनी उन्नति चाहने वाले इन दोनों का परित्याग कर दें।
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