सीवीसी ने सीबीआई के सीवीओ को एक्शन लेने के लिए किया रिकमेंड
शहर के टॉयलेट ब्लॉक्स पर एडवरटाइजमेंट के टेंडर में हुई गड़बड़ी के मामले में अब सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) ने सीबीआई के सेंट्रल विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) को मामले पर एक्शन लेने को कहा है। सीवीओ को एक्शन लेने के लिए एक महीने का समय दिया है ताकि वह यह तय कर सके कि इस मामले पर क्या एक्शन ले सकते हैं। दरअसल टेंडर में गड़बड़ी के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में केस की सुनवाई चल रही है। केस में एक तरफ सेलवेल कंपनी व पूर्व एसई आरसी दीवान हैं जबकि उनकी दूसरी ओर सीबीआई है। इस मामले में सीबीआई ने शिकायतकर्ता को ही शिकायतकर्ता मानने से इनकार कर दिया है। इसलिए सीबीआई के खिलाफ प्रधानमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई थी। इसी का असर यह हुआ था कि पीएमओ से डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) को एक्शन लेने के निर्देश हुए थे। डीओपीटी ने सीवीसी को लिखा था और अब सीवीसी ने सीबीआई के सीवीओ को लिखा है। इस शिकायत में कहा गया है कि एफआईआर के दौरान 13.66 करोड़ रुपए का नुकसान दिखाया गया था जोकि कोर्ट में चालान पेश करते हुए 25 लाख का कर दिया गया।
शिकायतकर्ता ने सीबीआई को दी थी शिकायत: इस शिकायत में लिखा था कि शिकायतकर्ता ने सीबीआई से दिसंबर 2013, जनवरी 2014 को सीबीआई के एसपी के ऑफिस में निगम के अफसरों व सेलवेल कंपनी के खिलाफ शिकायत दी थी। मई 2015 में उन्होंने इससे संबंधित अन्य डॉक्यूमेंट्स भी जमा करवाए। शिकायत में कहा कि 2007 में कैसे सेलवेल ने कंपनी के साथ मिलकर निगम के अफसरों ने टेंडर को ही बदल दिया। इससे निगम को करोड़ों का नुकसान हुआ और सीबीआई ने दिसंबर 2014 में एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में पूर्व एक्सईएन, पूर्व एसई और पूर्व चीफ इंजीनियर सहित कंपनी को आरोपी बनाते हुए 13.66 करोड़ का नुकसान दिखाया गया। एफआईआर के 1 साल बाद भी सीबीआई ने कोर्ट में चालान पेश नहीं किया। सीबीआई डायरेक्टर को इसकी शिकायत की तो सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर ए मनोहर साही ने शिकायतकर्ता को ऑफिस बुलाया और सारे फैक्ट्स के बारे में बताया। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट के आदेशों के बाद सीबीआई ने कोर्ट में चालान पेश किया।
13.66 करोड़ का चालान हुआ 25 लाख रुपए का
शिकायत में कहा कि करीब दो साल के बाद जब सीबीआई ने चालान पेश किया तो हैरानी यह जानकर हुई कि चालान में नुकसान 13.66 करोड़ की बजाए 25 लाख रुपए का कर दिया गया। अब केस की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने शिकायतकर्ता को मानने से इनकार कर दिया है। यही वजह रही कि यह मामला पीएमओ से डीओपीटी फिर सीवीसी और अब सीबीआई के सीवीओ को एक्शन लेने रिकमेंड किया गया है। खासबात है कि सीवीसी के पास साल में 10 हजार से ज्यादा शिकायतें आती हैं लेकिन सिर्फ 20 से 30 शिकायतें ही सीबीआई को एक्शन लेने के लिए भेजी जाती हैं और उन्हीं में से यह एक शिकायत है।