हर एरिया के लिए अलग हो नीड बेस्ड चेंज पाॅलिसी
हाउसिंग बोर्ड के हजारों अलाॅटीज को नीड बेस्ड चेंज की राहत मिलने वाली है। बोर्ड की 17 अप्रैल को होने वाली बैठक में नीड बेस्ड चेंज में दी जाने वाली रिलेक्सेशन पर चर्चा होगी। बोर्ड अपने हर एरिया के लिए अलग से नीड बेस्ड चेंज पाॅलिसी लाने पर काम कर रहा है। नीड बेस्ड चेंज को रेगुलराइज करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट पर भी चर्चा होगी। बोर्ड के नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स वन टाइम सेटलमेंट के हक में है जबकि बोर्ड अभी मिसयूज और वाॅयलेशन के लिए पेनल्टी वसूल रहा है।
हाउसिंग बोर्ड ने 100 रुपए प्रतिवर्ग फुट के हिसाब से पेनल्टी लगाई हुई है। बोर्ड ने 15 अप्रैल तक अलाॅटीज को डिस्काउंट सहित पेनल्टी जमा कराने को कहा था। अभी तक बोर्ड के दस परसेंट अलाॅटीज ने भी यह पेनल्टी जमा नहीं कराई है। बोर्ड के 60 हजार फ्लैट्स हैं। इसमें से 80 परसेंट लोगों ने अपने मकानों में जरूरत के अनुसार बदलाव किया हुआ है।
बोर्ड के डायरेक्टर प्रेम कौशिक के अनुसार वह हर साल पेनल्टी की बजाय वन टाइम सेटलमेंट के हक में हैं। बोर्ड के डायरेक्टर रघुवीर लाल अरोड़ा भी इसके हक में है। शहर की एमपी किरण खेर ने भी हाल ही में प्रशासन के सीनियर अफसरों और हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन अजॉय कुमार सिन्हा और सीईओ हरीश नैयर के साथ मीटिंग में भी वन टाइम सेटलमेंट का मुद्दा बैठक में शामिल करने को कहा था।
सीएचबी रेजिडेंट फेडरेशन के प्रोफेसर निर्मल दत्त के अनुसार बोर्ड के अलाॅटी वन टाइम सेटलमेंट चाहते हैं। कोई भी अलाॅटी पेनल्टी जमा नहीं कराएगा। बोर्ड को सभी पुरानी कंस्ट्रक्शन को नीड बेस्ड पाॅलिसी के तहत रेगुलराइज ही करना चाहिए।
रेट फिक्स करना होगा बोर्ड के लिए दिक्कत...
बोर्ड के सामने सबसे बड़ी दिक्कत वन टाइम सेटलमेंट के लिए रेट तय करने की होगी। बोर्ड के डायरेक्टर्स चाहते हैं कि यह वन टाइम सेटलमेंट फीस लोगों की जेब के भीतर हो। मौजूदा समय में यदि 100 रुपए प्रतिवर्ग फुट के हिसाब से 100 वर्ग फुट की पेनल्टी दी जाती है तो यह 10 हजार रुपए सालाना पहुंच जाती है। डिस्काउंट पीरियड के भीतर यह कैटेगरी के हिसाब से तीन हजार से लेकर 6 हजार रुपए सालाना तक है। बोर्ड के डायरेक्टर प्रेम कौशिक के अनुसार उनका फोकस रहेगा कि यह फीस कम से कम हो ताकि लोग अपनी नीड बेस्ड चेंज रेगुलराइज करवा सकें।