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पाठ्यक्रम एक समान होने पर ही पता चलेगा कि कौन सा स्कूल कितनी एजुकेशन दे रहा
चंडीगढ़| शहर के प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो एनसीईआरटी की पुस्तकों के अलावा हर स्कूल अतिरिक्त पुस्तकें लगवाता ही है, जोकि अलग-अलग प्रकाशकों की होती है। इसके अलावा स्टूडेंट्स से कई ऐसे प्रोजेक्ट भी कराए जाते हैं, जोकि बच्चे की पढ़ाई का अंग नहीं होते हैं। इन प्रोजेक्ट में हजारों रुपए का खर्च आता है, जोकि अभिभावकों को करना पड़ता है।
वहीं, आरटीई की सदस्य प्रियंका कानगो ने बताया कि राइट टू एजुकेशन एक्ट के सेक्शन-29 में साफ किया गया है कि शिक्षा का अभिप्राय एक समान पाठ्यक्रम बच्चों को पढ़ाना है। यदि पाठ्यक्रम एक जैसा होगा, तो निश्चित तौर पर शिक्षा का स्तर एक समान रहेगा। सभी प्राइवेट स्कूलों में एकरूपता होना अनिवार्य है। पाठ्यक्रम एक समान होने से साफ हो सकेगा कि कौन सा स्कूल बच्चों को कितनी बेहतर एजुकेशन दे रहा है। कुछ स्कूल