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हरियाणा में चौथे दर्जे की पार्टी है बसपा 13 सीटों पर 10 से 28 फीसदी हैं वोट

3 वर्ष पहले
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करीब साढ़े तेरह साल से सत्ता से बाहर इनेलो के प्रदेश में चौथे दर्जे की बसपा से गठबंधन को उसके वापसी का प्रयास माना जा रहा है। बसपा का हरियाणा में परंपरागत वोट बैंक है जो चुनावी खेल बना और बिगाड़ सकता है। बात यदि पिछले चार चुनाव की करें तो वोट बैंक कुछ घटा-बढ़ा जरूर है। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को 4.37 फीसदी वोट मिले और वह चौथे नंबर पर रही। हालांकि 2009 के विधानसभा चुनाव में उसे 6.37 फीसदी वोट मिले थे।

13 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों ने 10 से 28 फीसदी तक वोट हासिल किए थे। छह सीटें एेसी थी, जिन पर उम्मीदवार 5 से 9 फीसदी वोट ले पाए थे। इनेलो के करीब 17 उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे, जिनमें ज्यादातर का विजेता उम्मीदवार से मािर्जन 5 फीसदी से कम था। ऐसे में गठबंधन से इनेलो को फायदा होने के आसार बन सकते हैं। इनेलो ने जब भी कभी किसी पार्टी से गठबंधन किया है, उसे फायदा ही मिला है। हालांकि सीटों का बंटवारा अभी न होने से यह स्थिति स्पष्ट नहीं है कि बसपा को कितनी सीटें मिलेंगी और इनेलो को कितनी।

गठबंधन में हमेशा फायदे में रहा है इनेलो

तीसरे मोर्चे की पहले भी यही से हुई, कहा- इतिहास दोहराएंगे

अभय ने कहा’ ‘बसपा प्रमुख मायावती की अगुवाई में तीसरे मोर्चे के गठन की शुरुआत हरियाणा से हो गई है। वर्ष 1987 में भी देश को कांग्रेस मुक्त बनाने की मुहिम इसी राज्य से चौधरी देवीलाल की अगुवाई में हुई थी। 1989 के लोकसभा चुनाव के लिए विश्वनाथ प्रताप सिंह की अगुआई में विपक्षी दलों को एकजुट किया। उसी इतिहास को दोहराते हुए फिर हरियाणा में इस बदलाव की नींव रखी है। 2019 में केंद्र में मायावती के नेतृत्व में गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपा सरकार बनेगी।’

तीसरे मोर्चे में कांग्रेस पर फंस सकता है पेंच

अभय ने तीसरे मोर्चे में कांग्रेस को शामिल न करने की घोषणा की। डॉ. मेघराज इसे लेकर पूछे सवाल को टाल गए। उन्होंने कहा कि इसका जवाब मायावती ही दे सकती हैं। शिअद को लेकर कहा कि इसका जवाब वे ही देंगे। ज्ञातव्य है इनेलो-बसपा में 1998 में गठबंधन हुआ था।

हजकां से भी बसपा ने किया था गठबंधन

बसपा ने 2009 के विधानसभा चुनाव से पहले कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस से भी गठबंधन किया था। लेकिन यह चुनाव से पहले ही टूट गया।

बसपा हरियाणा में चौथे नंबर की पार्टी है।

13 सीटों पर 10 से 28 फीसदी तक

छह सीटों पर 5 से 9 फीसदी तक

पिछले चुनाव में 7 फीसदी से ज्यादा लिए थे बसपा ने वोट

विधानसभा सीट वोट %

पृथला 27.45

जगाधरी 24.18

नारायणगढ़ 21.87

हथीन 20.62

तिगांव 19.82

जुलाना 17.95

असंध 16.53

सफीदों 14.82

सोहना 14.66

बड़खल 12.67

घरोंदा 12.32

जींद 10.87

साढ़ौरा 10.05

पिछले 4 चुनाव में प्रमुख चार पार्टियों का वोट बैंक

वर्ष 2014 में किसे कितने प्रतिशत मिले वोट

पार्टी वोट प्रतिशत

बीजेपी 33.26

इनेलो 24.11

कांग्रेस 20.58

बीएसपी 4.37

वर्ष 2009 में किसे कितने प्रतिशत मिले वोट

पार्टी वोट प्रतिशत

बीजेपी 9.09

इनेलो 25.79

कांग्रेस 35.08

बीएसपी 6.73

वर्ष 2005 में किसे कितने प्रतिशत मिले वोट

पार्टी वोट प्रतिशत

बीजेपी 10.36

इनेलो 26.77

कांग्रेस 42.46

बीएसपी 3.22

बेमेल शादी की तरह है इनेलो-बसपा का गठबंधन: सुभाष बराला

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने इनेलो-बसपा के गठबंधन को अक्षय तृतीय पर बेमेल शादी की तरह बताया है। उन्होंने कहा कि इनेलो 1998 में लोकसभा चुनाव के दिन बसपा से गठबंधन तोड़कर यह साबित कर चुका है कि वे मन से कभी एक नहीं हो सकते। दोनों ही पार्टियां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

गठजोड़ का वोट प्रतिशत

इनेलो ने जब भी किसी के साथ गठबंधन किया है, उसे फायदा ही मिला है। 1998 में लोकसभा चुनाव बसपा के साथ मिलकर लड़ा था। दस सीटों में तीन पर बसपा और सात पर इनेलो उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें सीटों पर इनेलो और एक सीट पर बसपा उम्मीदवार जीता। बाद में गठबंधन टूट गया और 1999 के उप चुनाव में इनेलो ने भाजपा के साथ गठबंधन किया। इसके बाद 2000 के विधानसभा के आम चुनाव में भी इनेलो का गठबंधन भाजपा के साथ रहा। इससे पहले 1987 में भाजपा के साथ हुए गठबंधन में पार्टी हरियाणा में सरकार बनाई थी।

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