पुण्य पाप के फल ही सुख दुख हैं : ईश्वर चंद्र शास्त्री
हमें जो सुख और दुख की अनुभूति होती है, वह हमारे पाप व पुण्यों का फल ही होता है। पाप का फल दुख और पुण्य का फल सुख के रूप में मिलता है। ये प्रवचन पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री ने पुरषोतम मास कथा के पहले दिन बुधवार को दिए। इस कथा का आयोजन खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर 28 में रोजाना शाम 6 बजे से किया जा रहा है। सुख चाहिए तो पुण्य कर्म करें।
मल मास जब भगवान की शरण में गया तो भगवान ने उसका नामकरण किया और नाम रखा पुरषोतम मास। यानि कि इस मल मास में पुण्य कर्म करने चाहिए। शास्त्री ने बताया कि ये कथा पूरा महीना 13 जून तक चलेगी।
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