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2 को रोशनी और दो को जिंदगी दे गए मंडी के मेहर, पीजीआई में 2 दिन से एडमिट थे

3 वर्ष पहले
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हमें नहीं पता कि ऑर्गन डोनेशन क्या होता है लेकिन इतना समझ आ गया कि हमारे इस फैसले से कई लोगों की जिंदगी बचाने में मदद मिल सकती है। इसलिए हमने यह फैसला ले लिया। करीब 55 साल की उम्र में अपनी जान गंवा चुके मेहर सिंह की प|ी शीला देवी ने ये बातें कहीं। ब्रेन डेड घोषित किए गए मंडी के मेहर सिंह अपनी मौत के बाद 2 लोगों को आंखों की रोशनी और दो को जिंदगी दे गए। उनकी प|ी शीला देवी ने कहा कि सिर्फ एक ही ख्याल मन में था कि शायद हमारे इस फैसले से कोई दूसरा अपने रिश्तेदारों के साथ थोड़ा लंबा समय बिता सकें। सरकाघाट मंडी के रहने वाले मेहर 15 मई को कंस्ट्रक्शन साइट पर काम के लिए गए लेकिन फिसलने की वजह से गिरे और बेहोश हो गए। उनको पीजीआई रेफर किया गया। 17 मई को उनको ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

किडनी और कॉर्निया ट्रांसप्लांट...

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एंड हेड एके गुप्ता ने कहा कि पीजीआई टीम की कोशिशों और उनकी प्रेरणा से धीरे-धीरे ऑर्गन डोनेशन करने वालों की संख्या बढ़ रही है हालांकि इसकी अभी और भी जरूरत है। इससे पहले इस साल 14 लोग ऑर्गन डोनेट हो चुके हैं। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि जब सिंह को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया तो उनके परिवार से संपर्क किया गया उनके तैयार होने के बाद सिंह की किडनी और कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया। इससे कॉर्नियल ब्लाइंड दो पेशेंट की मदद हो पाई है और लगभग अंतिम स्टेज पर पहुंच चुके 2 मरीजों की भी जान बचाई गई है। सिंह के बेटे शशि ने कहा कि उनके पिता जीवन भर दूसरों की खुशी के लिए देते ही रहे। उनकी इसी भावना को याद करते हुए ही उनके जीवन के बाद भी इसे जारी रखा गया। जीवन की लगभग आस खो चुके किडनी मरीजों के परिजनों ने सिंह के परिवार का धन्यवाद किया है।

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