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टीचर को पद से हटाने के लिए जरूरी है सीनेट की पूरी हाजिरी का दो तिहाई

3 वर्ष पहले
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पीयू के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व चेयरपर्सन डॉ. कोमल सिंह को टीचर के पद से हटाने के लिए सीनेट में की गई वोटिंग नाकाफी थी। यूनिवर्सिटी कैलेंडर में दिए गए सभी नियमों के अनुसार एक टीचर को पद से हटाने के लिए फुल हाउस यानि 91 मेंबर्स में से दो तिहाई का वोट होना जरूरी है। यह राय दी है लीगल एक्सपर्ट्स ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को। इस लीगल राय को 26 मई को होने जा रही सिंडिकेट की मीटिंग में रखा जाएगा। एक अप्रैल को हुई सीनेट की मीटिंग में 51 सीनेटरों ने कोमल सिंह को सजा देने के लिए वोट किया था। इसमें एक वोट इनवैलिड रहा। 18 सीनेटरों ने उसके डिमोशन के हक में वोट किया और 32 ने उसको नौकरी से हटाने के हक में वोट दिया। इसके बाद वीसी ने मीटिंग में कह दिया था कि वह इस मामले में कानूनी राय लेंगे क्योंकि सभी वोट आखिरकार सजा के ही पक्ष में हैं। बस यह पता करना था कि सजा क्या होनी चाहिए। अब कानूनी राय के अनुसार इस वोटिंग को ही इनवैलिड करार दिया गया। उल्लेखनीय है कि किसी टीचर के खिलाफ पंजाब यूनिवर्सिटी कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरासमेंट (पीयूकैश) ने एक विशेष रिपोर्ट दी है जिसमें उक्त टीचर के खिलाफ सभी शिकायतें और उसकी जांच संबंधित रिपोर्ट, डीडीआर की कॉपी आदि शामिल है। इस रिपोर्ट के अनुसार सजा तय करने के लिए वीसी ने स्पेशल सीनेट 27 मई को मीटिंग बुलाई है।

ये हैं तीन मेजर पेनल्टीज...

1. रिडक्शन इन रैंक/ग्रेड पे दोबारा उसको छह हजार रुपए ग्रेड पे पर कर दिया जाएगा। दोबारा एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए उसको दोबारा आठ साल और लगेंगे। बिना सजा के वह दो साल में एसोसिएट प्रोफेसर बन सकते थे।

2. पद से हटाना लेकिन वह किसी भी नौकरी के योग्य रहेंगे और दोबारा पीयू में अप्लाई कर सकेंगे

3. पद से हटाना और हमेशा के लिए नौकरी के अयोग्य करना।

ये है मामला...

पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के इस असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपनी स्टूडेंट को गलत संदेश भेजे। उसको कहा कि तुम्हारी आंखें मेरी प|ी जैसी हैं, इनमें दर्द है और मैं तुम्हें प्यार करता हूं। उसके बाद एक अन्य मामले में भी उसको दोषी करार दिया गया है। इसमें उसने लड़की के साथ मारपीट का भी प्रयास किया। एक अन्य मामले में उसने अपनी क्लास में ही आकर स्टूडेंट्स से बदतमीजी की। कुछ मामलों में लड़कियों ने उसकी शिकायत देकर वापस ले ली क्योंकि वह इसमें आगे कार्रवाई नहीं चाहती थीं।

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