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प्रशासन ने नहीं बनाए बस क्यू शेल्टर, अदालत ने 10 दिन में मांगा है जवाब

3 वर्ष पहले
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डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भी जनहित याचिका के रास्ते खुल गए हैं। सिविल जज सीनियर डिवीजन बरजिंदर पाल सिंह ने बीते शुक्रवार को पंचकूला के एक कपल के जनहित में चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ एक याचिका करने की स्वीकृति दे दी है। एडवोकेट पंकज चांदगोठिया और उनकी प|ी संगीता चांदगोठिया ने सिविल प्रोसिजर कोड की धारा 91 के तहत एक अर्जी दायर करते हुए अदालत से अनुमति मांगी थी कि उन्हें चंडीगढ़ में बस क्यू शेल्टर न होने के मामले में जनहित याचिका दायर करने की अनुमति दी जाए और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। चांदगोठिया ने बताया कि सेक्शन 91 के तहत कोई भी दो व्यक्ति मिलकर पब्लिक न्यूसेंस के मामलों में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि जनहित से जुड़े हरेक मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में ही हो। चांदगोठिया ने यह याचिका भास्कर में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए दायर की है।

अदालत को बताया कि चंडीगढ़ में करीब 300 बस शेल्टर्स को दो साल पहले प्रशासन ने यह कह कर तोड़ दिया था कि उन्हें नए डिजाइन से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाया जाएगा। मगर ऐसा न होने पर चांदगोठिया ने 2017 में 2 महीने का नोटिस देते हुए कहा था कि बस शेल्टर दो महीने के अंदर नहीं बनाए गए तो वह सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

...तब तक रेट कम कर दिए जाएं

सिविल जज सीनियर डिवीजन बरजिंदर पाल सिंह ने चंडीगढ़ के फाइनेंस सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी, डीसी और सीटीयू को 10 दिन का अर्जेंट दस्ती नोटिस जारी करते हुए 28 मई को अपना पक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं। मांग की गई है कि जब तक बस शेल्टर नहीं बना दिए जाते तब तक बस टिकट का रेट 50% कम कर दिया जाए। क्योंकि बस शेल्टर भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा का हिस्सा है। बस शेल्टर न होने से आम जनता को मौसम की मार झेलनी पड़ती है।

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