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नगर निगम ने प्रशासन से मांगे 160 करोड़

3 वर्ष पहले
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नगर निगम ने प्रशासन से जरूरी कामों के लिए 160 करोड़ रुपए मांगे हैं। इसकी डिटेल रिपोर्ट निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव ने पिछले सप्ताह प्रशासक के सलाहकार परिमल राय को सौंपी थी। मेयर देवेश मोदगिल ने पिछले सोमवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनोर से मिलकर एमसी के कामों के लिए 250 करोड़ मांगे थे। लेकिन प्रशासक ने मेयर देवेश मोदगिल को भरोसा दिया था कि एमसी के फाइनेंशियल क्रंच को 10-15 दिन में हल कर दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा था कि अभी एडवाइजर शहर में नहीं हैं। उनके आने के बाद ही एमसी के फंड पर चर्चा करेंगे। इसी को देखते हुए एमसी कमिश्नर जितेंद्र यादव ने पिछले बुधवार को प्रशासक के सलाहकार परिमल राय से मिलकर एमसी बजट और खर्चे संबंधी डिटेल रिपोर्ट सौंपी। इसमें बताया गया कि एमसी को ग्रांट इन ऐड से 267 कराेड़ रुपए प्रशासन से मिलना है, जबकि एमसी अपने संसाधनों से 170 करोड़ रुपए जुटाएगा। इन दोनों को मिलाने से एमसी के पास 437 करोड़ रुपए होगा। हर महीने एमसी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, बिजली बिल, पानी बिल, टेलीफोन बिल और अन्य जरूरी कामों पर 41.66 करोड़ रुपए खर्च करता है। इस हिसाब से एमसी को साल में 500 करोड़ खर्च है। जबकि निगम के पास ग्रांट इन ऐड और अपने संसाधन से 437 करोड़ हैं। यही गैप 63 करोड़ का है। इसके अलावा ठेकेदारों का बकाया 40 करोड़ देना है। एमसी को रोड रिकार्पेटिंग और अन्य जरूरी काम भी करवाने हैं। इस हिसाब से एमसी को 160 करोड़ रुपए की और जरूरत है।

निगम कमिश्नर की ओर से सबमिट की रिपोर्ट में कहा गया कि अभी एमसी को पहली ग्रांट इन ऐड के 67 करोड़ 25 लाख मिले है, इससे पहले भी 20 करोड़ रुपए एफडी से बचे थे। इनमें से कुछ फंड सैलरी हेड में चला गया। अब एमसी के पास 80 करोड़ रुपया है। इसे तो किसी हेड में नहीं ट्रांसफर किया जा सकता है। क्योंकि एमसी कर्मचारियों की सैलरी, बिजली, पानी, टेलीफोन के बिल और अन्य जरूरी खर्चों पर हर माह 50 करोड़ खर्च हो रहा है।

ये बोले कमिश्नर...

निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव का कहना है कि एमसी को साल 2018-19 के बजट में 160 करोड़ रुपए और दिए जाएं। इसमें 40 करोड़ तो ठेकेदारों का बकाया पेमेंट पर खर्च होगा, हर महीने के जरूरी खर्च, कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन पर 41.66 करोड़ खर्च हो रहा है। यह साल में 500 करोड़ हो रहा है। इसका गैप ही 63 करोड़ है। इसके अलावा जरूरी काम भी 100 करोड़ के होने हैं। इस हिसाब से एमसी को 160 करोड़ रुपए बजट में और दिए जाने की मांग की है।

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