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रिश्वत मामले में इस्टेट ऑफिस के पूर्व सुपरिंटेंडेंट और एडवोकेट दोषी करार, सजा पर फैसला 24 को

3 वर्ष पहले
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सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने 8 साल पुराने रिश्वत मामले में यूटी इस्टेट ऑफिस के पूर्व सुपरिंटेंडेंट महल चंद और एडवोकेट वरिंदर धवन को दोषी करार दिया है। दोनों को 24 मई को सजा सुनाई जाएगी। इन दोनों के खिलाफ एक डॉक्टर की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। ये दोनों उस डॉक्टर के घर की एनओसी के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहे थे। सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने महल चंद और धवन को प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7, 13(1)(डी) और आईपीसी की धारा 120बी के तहत दोषी करार दिया है। गवर्नमेंट हॉस्पिटल सेक्टर-6 पंचकूला के रिटायर्ड एसएमओ डॉ. सोहन लाल अरोड़ा ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उन्हें उनके सेक्टर-18 स्थित घर को बेचने के लिए इस्टेट ऑफिस से एनओसी की जरूरत थी। इसके लिए दो लाख रुपए की रिश्वत की मांग की जा रही थी।

शिकायत के मुताबिक उनके घर की सेल को लेकर उनका चंडीगढ़ के भगवंत बंसल के साथ डिस्प्यूट चल रहा था। जिला अदालत ने उनके घर की सेल पर स्टे लगा दी थी जिसके बाद वे हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने ये स्टे हटा दी थी। इसके बाद डॉ. अरोड़ा ने अपने घर को बेचने के लिए इस्टेट ऑफिस से एनओसी के लिए अप्लाई किया। उन्हें इस्टेट ऑफिस से कुछ और डॉक्यूमेंट्स जमा करवाने के लिए लेटर भेजा गया। उन्होंने सभी डॉक्यूमेंट्स जमा करवा दिए, लेकिन फिर भी उनका काम नहीं बना। इसी बीच प्रॉपर्टी डीलर और वरिंदर धवन ने उनसे कॉन्टेक्ट किया। धवन ने कहा कि इस्टेट ऑफिस के सुपरिटेंडेंट महल चंद ने उन्हें मैसेज दिया है कि अगर वे 2 लाख रुपए दें तो उनका काम हो जाएगा। एडवांस में एक लाख रुपए जमा करवाने के लिए कहा गया।

5 साल तक चला ट्रायल

डॉ.अरोड़ा ने इस मामले में सीबीआई को शिकायत दे दी। सीबीआई ने फिर महल चंद को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया। 30 नवंबर 2010 को महल चंद को इस्टेट ऑफिस से एक लाख रुपए की रिश्वत के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने एडवोकेट धवन को भी गिरफ्तार किया। इस केस में सीबीआई कोर्ट ने 7 फरवरी 2013 को इनके खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिए थे और करीब 5 साल तक ट्रायल चलने के बाद कोर्ट न इन्हें दोषी करार दे दिया। फिलहाल ये दोनों जमानत पर हैं और 24 मई को इनकी सजा पर फैसला होगा।

सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने 8 साल पुराने रिश्वत मामले में यूटी इस्टेट ऑफिस के पूर्व सुपरिंटेंडेंट महल चंद और एडवोकेट वरिंदर धवन को दोषी करार दिया है। दोनों को 24 मई को सजा सुनाई जाएगी। इन दोनों के खिलाफ एक डॉक्टर की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। ये दोनों उस डॉक्टर के घर की एनओसी के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहे थे। सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने महल चंद और धवन को प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7, 13(1)(डी) और आईपीसी की धारा 120बी के तहत दोषी करार दिया है। गवर्नमेंट हॉस्पिटल सेक्टर-6 पंचकूला के रिटायर्ड एसएमओ डॉ. सोहन लाल अरोड़ा ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उन्हें उनके सेक्टर-18 स्थित घर को बेचने के लिए इस्टेट ऑफिस से एनओसी की जरूरत थी। इसके लिए दो लाख रुपए की रिश्वत की मांग की जा रही थी।

शिकायत के मुताबिक उनके घर की सेल को लेकर उनका चंडीगढ़ के भगवंत बंसल के साथ डिस्प्यूट चल रहा था। जिला अदालत ने उनके घर की सेल पर स्टे लगा दी थी जिसके बाद वे हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने ये स्टे हटा दी थी। इसके बाद डॉ. अरोड़ा ने अपने घर को बेचने के लिए इस्टेट ऑफिस से एनओसी के लिए अप्लाई किया। उन्हें इस्टेट ऑफिस से कुछ और डॉक्यूमेंट्स जमा करवाने के लिए लेटर भेजा गया। उन्होंने सभी डॉक्यूमेंट्स जमा करवा दिए, लेकिन फिर भी उनका काम नहीं बना। इसी बीच प्रॉपर्टी डीलर और वरिंदर धवन ने उनसे कॉन्टेक्ट किया। धवन ने कहा कि इस्टेट ऑफिस के सुपरिटेंडेंट महल चंद ने उन्हें मैसेज दिया है कि अगर वे 2 लाख रुपए दें तो उनका काम हो जाएगा। एडवांस में एक लाख रुपए जमा करवाने के लिए कहा गया।

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