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सोलर प्लांट लगाने को चुनौती, प्रशासन को कोर्ट का नोटिस

3 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ में रेजीडेंशियल और नॉन रेजीडेंशियल बिल्डिंग्स की छतों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जाने के चंडीगढ़ प्रशासन के फैसले को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर प्राथमिक सुनवाई के बाद जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस राजबीर सहरावत की खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर मामले पर जवाब मांगा है। 97 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी अफसर कर्नल पिरथी पाल सिंह गिल की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि छतों पर सोलर प्लांट जरूरी लगाए जाने का फैसला मनमाना है। प्रशासन की तरफ से कहा गया कि सोलर प्लांट न लगाए जाने पर प्लाॅट को खाली कराया जा सकता है। यह बिना कारण दी जा रही धमकी है जिसकी कोई कानूनी मंजूरी नहीं है। रेजीडेंशियल बिल्डिंग्स की छतों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जाने के फैसले से उन्हें मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। किसी के मकान की छत पर जबरन सोलर प्लांट लगाने को कैसे कहा जा सकता है। ऐसे में चंडीगढ़ रिन्युएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोमोशन सोसायटी के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारी बेवजह बिना किसी कानूनी मंजूरी के छतों पर सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए विवश नहीं कर सकते। याचिका में मांग की गई कि मुख्य प्रशासक की तरफ से 18 मई 2016 को जारी अधिसूचना को खारिज किया जाए। यह अधिसूचना बिना किसी लीगल सेंक्शन अथवा अथारिटी के जारी की गई जिसे वैध नहीं माना जा सकता। याचिका में मांग की गई कि मामले के विचाराधीन रहते अधिसूचना पर रोक लगाई जाए। याचिका पर प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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