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काउंसलर्स की रिपोर्ट में साफ: स्मार्ट पार्किंग सिर्फ पैसे के लिए बाकी इनमें कुछ भी नहीं

3 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

नगर निगम के काउंसलर्स की रिपोर्ट पर सोमवार को हाउस में चर्चा होगी। रिपोर्ट में क्लियर किया गया है कि पार्किंग चलाने वाली कंपनी आर्या टोल इंफ्रा ने एंट्री पॉइंट पर कियोस्क बनवाकर डिजिटल स्क्रीन तो लगा रखी हैं लेकिन पार्किंग में स्मार्ट पार्किंग में (आरएफआईडी) रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन रीड करने के लिए इंतजाम नहीं हैं। पास मैनुअल बन रहे हैं। पार्किंग स्पेस में 50 मीटर पर कर्मचारी तैनात नहीं हैं। इसलिए गाड़ियां गलत तरीके से खड़ी हो रही हैं। पार्किंग स्टाफ बिना वर्दी और नेम प्लेट के मिला। एमओयू की कंडीशन का वॉयलेशन किया जा रहा है। इस रिपोर्ट से ये साफ हो रहा है कि स्मार्ट पार्किंग सिर्फ पैसे के लिए है और सुविधाएं इसमें कुछ नहीं हैं। हाउस में रिपोर्ट पर डिस्कस होने के साथ ही काउंसलर द्वारा निगम अफसरों की स्मार्ट पार्किंग पर दिसंबर 2017 और 27 मार्च 2018 की चेकिंग रिपोर्ट पर बढ़े रेट पर सवालिया निशान उठेगा। जब पार्किंग अब तक स्मार्ट नहीं बनी है तो अफसरों की रिपोर्ट पर 8 दिसंबर को कैसे पार्किंग रेट बढ़ गए। वहीं 27 मार्च को बनी अफसरों की रिपोर्ट पर पहली अप्रैल से पार्किंग रेट डबल कैसे किए गए। हाउस में पहली अप्रैल से बढ़े रेट वापस हो सकते हैं। वहीं काउंसलर 29 जून 2017 को किए गए एमओयू को भी चेंज करने का मामला उठा सकते हैं।

- अफसर नाकाम: पेज 3

आज हाउस में चर्चा को आएगी रिपोर्ट, लोगों के विरोध के बाद काउंसलर्स भी रेट के खिलाफ

पार्किंग काे कैंसिल क्यों नहीं किया गया

निगम काउंसलर्स का कहना है कि वे हाउस में मामला उठाएंगे कि जब एमओयू की कंडीशन में एक ही पार्किंग में एक कंडीशन का पांच बार वॉयलेशन होने पर चालान होते हैं तो पार्किंग कैंसिल होती है। लेकिन एमसी अफसरों ने तो पार्किंग में स्पेस से ज्यादा वाहन पार्क करवाने के भी एक पार्किंग में पांच चालान नहीं किए। न ही वर्दी पर चालान किए गए। कंपनी की ओर से वर्दी के नाम पर कर्मचारियों को जैकेट पहनाई हुई है, वह एमओयू की कंडीशन का वॉयलेशन है। न ही कर्मचारियों की नेम प्लेट लगी हुई है। आई कार्ड नेम प्लेट नहीं है। यह भी एमओयू की कंडीशन का वॉयलेशन है। इनके एक पार्किंग में जो चालान किए गए हैं लेकिन उन पर जुर्माना भी उतना नहीं लगाया गया है। अफसरों ने कंपनी की फेवर की है। हाउस में मेयर द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट पर ही चर्चा होगी। वहीं निगम कमिश्नर 29 जून 2017 को हुए एमओयू का हवाला देंगे।

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