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टीचर का लिवर ग्रीन कॉरीडोर से दिल्ली भेजा, दो ब्रेन डेड ने दिया 9 लोगों को नया जीवन

3 वर्ष पहले
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पीजीआई के रोटो डिपार्टमेंट की ओर से ऑर्गन डोनेट करने को लेकर लोगों को जागरुक करने के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पहले लोग अंगदान करने से कतराते थे। अब खुद इसके लिए आगे आ रहे हैं। इसके चलते इस रीजन के कई जरूरतमंद मरीजों की नई जिंदगी मिल रही है। देश के दूसरे राज्यों में भी जरूरतमंद मरीजों को भी इसका फायदा मिल रहा है। इसी मकसद के तहत पीजीआई में दो मरीजों के ब्रेन डेड होने पर उनके परिवार की ओर से उनके ऑर्गन डोनेट किए। इससे 9 जरूरतमंद मरीजों को जिंदगी मिल गई। इसमें चार नेत्रहीन मरीजों में कार्निया ट्रांसप्लांट कर उनकी जिंदगी को रोशन किया गया, जो लंबे समय से कार्निया दान में मिलने का इंतजार कर रहे थे।

जीरकपुर के गुरुकुल स्कूल की 37 साल की टीचर सतवीर कौर को 13 अप्रैल को सिर में तेज दर्द होने पर जीरकपुर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया। यहां से पीजीआई लाया गया। उसी रात सतवीर कौर को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अस्पताल ने पीजीआई रोटो टीम से संपर्क कर उन्हें पीजीआई भेज दिया। यहां पीजीआई के रोटो के नोडल ऑफिसर डॉ. विपिन कौशल की टीम ने सतवीर कौर के परिवार को लोगों से ऑर्गन डोनेट का आग्रह किया। पीजीआई में सतबीर कौर के पति नीतिश शर्मा ने मरीज के ऑर्गन डोनेट करने के लिए शपथ पत्र भरा। इसके बाद सतवीर का लिवर, किडनी व कॉर्निया जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट के योग्य पाया गया। वहीं पीजीआई में लिवर की मैच न होने पर उसे दिल्ली स्थित लिवर एवं बिलियरी साइंस संस्थान में उपचाराधीन मरीज के साथ मैच हो गया। इस पर 14 अप्रैल को लिवर को ग्रीन कॉरिडोर से चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दिल्ली भेजा गया। जहां उसे मरीज में ट्रांसप्लांट कर उसकी जिंदगी को बचाया गया। किडनी व कार्निया को पीजीआई में मरीजों में ट्रांसप्लांट किया गया।

पति ने कहा-मेरी प|ी हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहती थीं

सतवीर कौर के पति नीतिश शर्मा ने कहा कि मेरी प|ी दया और अपने काम के प्रति वफादारी का दूसरा नाम था। हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहती थी इसलिए उनके जाने पर उसके ऑर्गन को दान करने का फैसला लिया। वह भी अंगदान के प्रति काफी जागरूक थीं।

कुरुक्षेत्र के जसविंद्र सिंह की किडनी व कॉर्निया जरूरतमंदों को ट्रांसप्लांट

एक अन्य केस कुरुक्षेत्र के रहने वाले 37 साल के जसविंद्र सिंह का है। वे 10 अप्रैल को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पहले उसके घरवाले कुरुक्षेत्र के हॉस्पिटल में इलाज में ले गए। डॉक्टरों ने पीजीआई रेफर कर दिया। पीजीआई में आने पर डॉक्टरों की ओर से मरीज की जान को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन सिर में गंभीर चोटें आने के कारण रिवाइव नहीं कर पाया। मरीज 12 अप्रैल को ब्रेन डेड घोषित होने पर परिवार की सभी उम्मीदें विफल हो गईं। जसविंद्र सिंह के ब्रेन डेड होने पर घरवालों ने उनकी किडनी व कॉर्निया को लेकर पीड़ित मरीजों से मैच करने के बाद ट्रांसप्लांट किया गया। दोनों मरीजों के घरवालों की ओर से अंगदान करने पर 5 किडनी के मरीजों एवं 4 कार्निया रोग से ग्रस्त मरीजों में ट्रांसप्लांट कर उन्हें जिंदगी दी गई। जसविंद्र सिंह की प|ी कुसुम ने कहा कि जो दर्द हमने यहां ट्रामा सेंटर में देखा और सहा वह जरूरतमंद मरीजों को अंगदान करने से कुछ हद तक कम होगा। उन्होंने कहा कि मेरे पति मेरे लिए सब कुछ थे। वह नेक दिल इंसान थे फिर भी भाग्य हमारे लिए इतना कठोर रहा है। ऑर्गन डोनेट के साथ कम से कम मैं किसी और को अपने माता पिता को खोने के दर्द और दुख को बचाने में सक्षम हो जाएगा। यह उनकी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

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