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महिला थाने दूर बनने से शिकायत करने से कतरा रहीं महिलाएं, संसाधनों की भी कमी

3 वर्ष पहले
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भास्कर टीम | चंडीगढ़/पानीपत/रोहतक/रेवाड़ी/हिसार/अम्बाला/कैथल

प्रदेश में महिला अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जहां छेड़छाड़ के मामलों में वृद्धि हुई, वहीं अपहरण के ढाई हजार मामले पिछले 10 माह में दर्ज हुए हैं। जहां वर्ष 2016-17 में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के 9499 मामले दर्ज हुए थे। वहीं पिछले 10 माह में यह आंकड़ा 9166 तक जा पहुंचा है। महिला थानों में पुलिस कर्मियों की कम संख्या बड़ी दिक्कत बन गई है।

सरकार की ओर से सभी जिलों में महिला थाने खोलने से अभी कई बड़ी दिक्कतें महिला पुलिस अधिकारियों के सामने आ रही हैं। दैनिक भास्कर ने प्रदेशभर के महिला थानों में कार्यरत पुलिस कर्मचारियों से बात की तो कई तथ्य सामने आए हैं। इनमें कानून की पेचीदगी सबसे बड़ी उलझन हैं। हालांकि पुलिस के आला अधिकारी अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में किसी तरह की कोर कसर भी नहीं छोड़ रहे हैं, लेकिन जब तक महिला पुलिस थानों की आईओ कानून के हर पहलू से वािकफ नहीं हो जाती, तब तक दिक्कत आती रहेगी। कुछ महिला थाने शहर से दूर होने के कारण महिलाएं वहां तक पहुंचने में हिचक रही हैं, वे अपने इलाके के थाने में ही शिकायत देने को प्राथमिकता देती हैं। कई जगह महिला स्टाफ की कमी भी बड़ी बाधा है। कुछ थानों में बीटेक पास महिला पुलिस कर्मचारी पहुंची हैं, इससे कंप्यूटर आदि चलाने की दिक्कतें दूर हो गई हैं। अब भी महिला थानों की निर्भरता दूसरे थानों पर हैं। स्टाफ व संसाधन की कमी को तुरंत दूर करने की जरूरत है, क्योंकि केस लगातार दर्ज हो रहे हैं।

ये हैं प्रमुख दिक्कतें

आरोपी को कहीं से गिरफ्तार करने जाने में।

नक्शा तैयार करने में दिक्कत।

देर रात को आरोपी को पकड़ने में दिक्कत।

कहीं रेड करने से पहले पुलिस टीम तैयार करने में दिक्कत।

कई जगह वाहनों की कमी।

पुलिस स्टाफ की कमी।

2015 में महिला पुलिस कर्मियों की संख्या 2651 थी। पुलिस विभाग की ओर से जल्द ही 1000 महिला कांस्टेबल व 66 सब इंस्पेक्टर की भर्ती की जाएगी।

छेड़छाड़ के मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी

अपराध 2015-16 2016-17 2017-18

दहेज हत्या 262 254 205

दुष्कर्म 1001 1049 1016

पलायन में दुष्कर्म 188 201 131

दुष्कर्म की कोशिश 120 127 155

छेड़छाड़ 1862 1889 2041

अपहरण 1698 2172 2495

दहेज उत्पीड़न 3470 3419 2735

तेजाब से हमला 12 8 7

महिलाओं की तस्करी 20 14 13

अनैतिक व्यापार 67 77 68

9.12%

हरियाणा में महिला पुलिसकर्मी

41501

पुरुष

3300 कांस्टेबल

314 हेड कांस्टेबल

287 एएसआई

182 एसआई

60 इंस्पेक्टर

16 एएसपी

5 एआईजी

2 आईजी

4166

महिला

प्रदेश में गत 10 माह में 2041 महिलाओं से छेड़छाड़ और 2495 का हुआ अपहरण

पानीपत के सेक्टर 13/17 में अगस्त 2015 में शुरू हुआ महिला थाना गांव-कस्बा की तो दूर, शहर की महिलाओं को भी राहत नहीं दे पाया। थाने तक जाने के लिए कोई साधन नहीं है। महिला अगर शिकायत लेकर यहां जाती है तो जीटी रोड पर यमुना एनक्लेव के पास उतरना पड़ता है। यहां से महिला थाना एक किलोमीटर दूर है। यहां ऑटो भी नहीं खड़े रहते, ऐसे में महिलाओं को पैदल ही जाना पड़ता है। इसलिए पीड़ित महिला थाना जाने की बजाय अपने क्षेत्र के थानों में ही केस दर्ज कराना उचित समझती हैं। महिला थाने में रेप का केस दर्ज कराने वाली एक महिला ने बताया कि वह गरीब है। हर बार ऑटो बुक कराकर नहीं आ सकती। रेप, छेड़छाड़ और दहेज प्रताड़ना के 2017 में 87 केस दर्ज हुए।

छेड़छाड़-रेप के 60 केस, 56 पकड़े

हिसार शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना का शिकार युवतियों को न्याय दिलाने के लिए महिला थाना पुलिस संजीदगी के साथ काम कर रही है। वर्ष 2017 में छेड़छाड़ और दुष्कर्म के 60 केस दर्ज हुए थे। इनमें से 56 मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे भेज दिया है। महिला सैल ने पिछले साल दंपति के बीच वैचारिक मतभेदों को दूर करके 1132 मामलों में से 1117 जोड़ियां एवं परिवारों को उजड़ने से बचाया।

थाने में दी एक्टिवा में तेल ही नहीं

अम्बाला सिटी पुलिस लाइन में चल रहे महिला थाने की स्थिति ठीक है। क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण महिला पुलिस कर्मियों को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। खासकर उन्हें ग्रामीण इलाकों में इनवेस्टीगेशन के दौरान आने-जाने में परेशानी आती है। क्योंकि महिला पुलिस कर्मियों के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है और उनके पास सरकार की तरफ से कोई व्हीकल नहीं हैं। हालांकि उन्हें चार एक्टिवा दी गई हैं, लेकिन पेट्रोल भरवाने की समस्या के कारण वह उनका इस्तेमाल नहीं करती ।

दिक्कतें हैं, महिला आईओ को सिखाया जाएगा काम

महिला पुलिस कर्मचारी अपने कार्य को ठीक तरीके से कर रही हैं। कुछ दिक्कत हैं, चूंकि पहली बार आईओ का कार्य महिलाएं देख रही हैं। कुछ जगह दिक्कत हैं, जहां दिक्कत हैं, वहां पर रिटायर्ड एवं दक्ष आईओ की ड्यूटी लगाई जाएगी, ताकि वे हर केस से संबंधित पूरी जानकारी महिला थानों में कार्यरत आईओ को बताएं। -बीएस संधू, डीजीपी हरियाणा

संसाधन कम

जांच अधिकारियों के अलावा साधनों की कमी है। थानों में महिला विरुद्ध अपराध संबंधित शिकायतें एवं दर्ज होने वाले मामलों का रिकॉर्ड भी दर्ज होने लगा है, जिससे वहां के स्टाफ पर वर्कलोड बढ़ा है।

पहुंच दूर

जिले में एक ही महिला थाना है, इसलिए गांवों की महिलाएं भी इंसाफ के लिए थाने तक पहुंच नहीं पाती। थाने में इनफ्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं है। पीने के पानी तक का उचित प्रबंध नहीं है।

कुछ न कहो, कामकाज का उपवास

बस कुछ न कहो, अब क्या पक्ष-विपक्ष सारा कामकाज उपवास ही कर रहा है। कुरुक्षेत्र में भी सांसद समर्थकों के साथ उपवास स्थल पर पहुंचे। पौन घंटा रुके, मंच से खूब लोकतंत्र उवाच हुआ। इनके जाते ही दो भाजपा विधायक भी चलते बने और कामकाज का उपवास जारी रहा। यमुनानगर में उपवास स्थल पर पहुंचे सांसद सहमे थे कि कहीं कोई छोले-भटूर खाने का आरोप न लगा दे। इसलिए 5 घंटे तक टैंट में पानी की बाेतल भी बैन रही।

ये तेरा नोटिस और ये ले मेरा नोटिस...

सरकार के एक मंत्री और एक विपक्षी सांसद में आजकल तलवारें खींची हुई हैं। घोटाले की पोल खोल भी चली। बाबा और इस युवा सांसद के बीच चल रही जुबानी जंग अचानक ही लिखित में शुरू हो गई है। एक ने बाबा को नोटिस भेज पूछा साबित करें वह नशे में कैसे है। इस पर बाबा भी खार खाए थे, उन्होंने इससे बड़ा नोटिस भेजने की बात कह डाली। बाबा इसलिए खफा हैं कि जब खरीद ही 40 करोड़ की है तो घपला 300 करोड़ कैसे हो गया?

खफा-खफा से हैं पोस्टर वाले काका जी

आजकल काकाजी की नाराजगी का एक पोस्टर सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है। नाराजगी को लेकर पोस्टर के जरिए किस पर निशाना साधा है, यह तो पोस्टर बनाने वाला ही बता सकता है। लेकिन सियासी हलकों में इसके मायने खूब निकाले जा रहे हैं। क्योंकि काका से नाराज तो मंत्री और भाजपा वर्कर भी हैं। कर्मचारी और विपक्ष तो खफा रहता ही है। पोस्टर में कर्मचारियों के दफ्तर समय पर न पहुंचने, ऑनलाइन ट्रांसफर होने और नौकरी के धंधे बंद होने से नाराजगी दिख रही है।

कुर्सी गई, चिंतन से चिंता दूर करते साब

हिमाचल में शुरू हुए चिंतन की चिंता सरकार ने अधिकारियों के जिम्मे लगा दी है। अफसरों को एक-एक पिछड़ा ब्लॉक दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा में एक डीजीपी रैंक के आईपीएस की हो रही है। इन दिनों वे गांवों में चिंतन शिविर कराने में बिजी हैं। साहब सरपंचों और लोगों से मिल रहे हैं। चिंता भी विस अध्यक्ष के गृह जिले की दी गई है, जिनसे उनका पहले ही 36 का आंकड़ा है। ऐसे में सियासत और ब्यूरोक्रेट्स में चर्चा है कि साहब को अध्यक्ष के इलाके की ज्यादा चिंता सता रही है। क्योंकि उनकी कुर्सी जाने के पीछे यह भी एक बड़ी वजह मानी गई थी।

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