पंजाब पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी बॉडी कैमरे का इस्तेमाल करे। इसके लिए डीजीपी अपने सहयोगी डीजीपी से केरल में भले ही फोन पर बात कर सकते हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ पुलिस भी अपने कामकाज के तौर तरीकों को बदले। जस्टिस अमोल र| सिंह ने कहा कि पुलिस खास तौर पर ड्रग्स मामलों में झूठे फंसाने के मामलों में इनका इस्तेमाल कर सकती है। चंडीगढ़ पुलिस ने अपने चालान करने वाले पुलिस अधिकारियों को पहले से ही बॉडी कैमरे सप्लाई कर रखे हैं। दूसरी तरफ हरियाणा सरकार ने इस मामले में पंचकूला के पुलिस कमिश्नर की देखरेख में गठित कमेटी की रिपोर्ट पेश करने के लिए समय दिए जाने की मांग की है। सुनवाई के दौरान पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा की तरफ से एफिडेविट दायर कर कहा गया कि दिल्ली हेडक्वार्टर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस ने बॉडी कैमरे को लेकर कुछ जानकारी दी हैं। कहा गया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को ये सुविधा मुहैया करवा दी गई है जबकि केरल के डीजीपी से इस बारे में जानकारी मांगी गई है। इस पर जस्टिस अमोल र| ने कहा कि आज के समय में भी पुलिस पत्राचार पर ही निर्भर क्यों है। पंजाब के डीजीपी क्या केरल के डीजीपी को फोन नहीं कर सकते और फोन पर भी यह जानकारी ली जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई पर डीजीपी बताएं कि केरल पुलिस से इस बारे में क्या जानकारी मिली। इन कैमरों के इस्तेमाल ऑडियो सुनने, वीडियो देखने और फोटोग्राफिक रिकार्डिंग सिस्टम के लिए किया जा रहा है।