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सेक्सुअल हैरासमेंट केस में रिसर्च स्कॉलर और स्टूडेंट के लिए भी पीयू तय करेगी सजा

3 वर्ष पहले
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पीयू में पढ़ने वाले रिसर्च स्कॉलर्स और स्टूडेंट्स अगर किसी के साथ सेक्सुअल हैरासमेंट मामले में फंसते हैं तो उनके लिए भी सजा तय की जाएगी। दरअसल अभी तक सेक्सुअल हैरासमेंट ऑफ वुमन एट वर्क प्लेस प्रिवेंशन प्रोहिबिशन एंड रीड्रेसल एक्ट 2013 के तहत इम्प्लाॅइज के लिए तो सजा तय है लेकिन इसमें रिसर्च स्कॉलर और स्टूडेंट के लिए सजा का प्रावधान नहीं है। ऐसे आरोपी को सजा देने के लिए नियम में भी बदलाव किया जा रहा है। डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. शंकर जी झा, प्रो. मीनाक्षी मल्होत्रा, प्रो. एके भंडारी, प्रो. पैम राजपूत, वी के सिब्बल और प्रो. मनविंदर कौर वाली कमेटी की सिफारिशें 26 मई को होने जा रही सिंडिकेट की मीटिंग में रखी जाएंगी। इसके अनुसार अब सेक्सुअल हैरासमेंट के आरोपी टीचर को पद से हटाने के लिए सीनेट की दो तिहाई बहुमत की बजाय सिंपल मेजोरिटी के आधार पर हटाना संभव होगा। हालांकि नियमों के इन बदलाव को मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट की मंजूरी की जरूरत होगी। कमेटी ने नए एक्ट के अनुसार सेक्सुअल हैरासमेंट की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है। पीयू के नियम अनुसार 60 दिन के अंदर रिपोर्ट सबमिट करना जरूरी होगा। पीयूकैश की रिपोर्ट के आधार पर यूनिवर्सिटी को जल्द कार्रवाई करनी होगी। यह कार्यवाही 2013 के एक्ट के अनुसार होनी चाहिए। इसके लिए जरूरत के अनुसार स्पेशल सिंडिकेट या सीनेट भी बुलाई जानी चाहिए।

यह भी आएंगे प्रस्ताव...

1. कंपन्सेट्री ग्राउंड पर दी जाने वाली अपॉइंटमेंट के केसेज पर डिसीजन होगा।

2. सीनेटर व पूटा प्रेसिडेंट प्रो. राजेश गिल की ओर से चांसलर को भेजी गई रिप्रेजेंटेशन संबंधित रिपोर्ट आएगी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर उनको महत्वपूर्ण जानकारियां बार-बार मांगने के बाद भी नहीं दी।

3. आयुष नेट क्वालिफाइड कैंडिडेट्स को पीएचडी करने के लिए यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट से छूट देने वाले लेटर पर विचार होगा।

4. यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बारे में स्टूडेंट को फाइनल ईयर में अपनी सभी री-अपीयर क्लीयर करने के लिए स्पेशल चांस दिया जाएगा।

5. स्टूडेंट के लिए पार्ट टाइम जॉब का प्रस्ताव आएगा। यह पॉलिसी सभी डिपार्टमेंट में लागू होगी।

अॉल्टरनेट मेडिकल प्रैक्टिशनर को पीएचडी के लिए नहीं देना होगा यूनिवर्सिटी का टेस्ट...पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के लिए आयुर्वेद सिद्ध, यूनानी, होम्योपैथी, योगा तथा नेचुरोपैथी में पोस्ट ग्रेजुएट कर चुके कैंडिडेट्स को यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस टेस्ट नहीं देना होगा। सिंडिकेट में इसको अप्रूवल मिलेगी की जो स्टूडेंट्स आयुष मंत्रालय की ओर से लिया जाने वाला आयुष नेट क्लियर कर चुके हैं, उनको किसी भी यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस देने की जरूरत नहीं है। 2016 में इसकी टेस्ट की शुरुआत हुई थी और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने 2018 अप्रैल में इसको अप्रूवल दे दी है। अब एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम के लिए स्टूडेंट्स को यह टेस्ट नहीं देना होगा। यूजीसी ने अप्रूवल दी है कि ऐसे कोर्सेज में एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम्स के लिए यूजीसी व आयुष दोनों का नेट वैलिड होगा। सिर्फ उन सब्जेक्ट को छोड़ कर जिनके लिए यूजीसी खुद नेट कंडक्ट करती है।

यूनिवर्सिटी में लगेगा सोलर पैनल...

यूनिवर्सिटी मीटिंग में सोलर पैनल लगाने की मंजूरी दे सकती है। सोलर एनर्जी काॅर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया की ओर से लेटर ऑफ एलोकेशन लेकर वेंडर ने यूनिवर्सिटी से इस बारे में संपर्क किया है। कमेटी ने रिपोर्ट दे दी है कि वेंडर को सोलर पैनल लगाने की इजाजत दे दी जाए। इसमें 25 साल तक इसे चलाने या मेंटेन करने की पूरी जिम्मेदारी वेंडर की होगी और लगभग 3.44 रुपए में बिजली मिलेगी। इस सिस्टम से यूनिवर्सिटी का खर्च सीधा 30% कम हो जाएगा।

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