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ब्लैक मनी के नाम पर जानकार के अकाउंट में फर्जी चेक से पैसे डलवाते, फिर कुछ हिस्सा देकर बाकी निकाल लेते

3 वर्ष पहले
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सेक्टर-17 थाना पुलिस ने लोगों के साथ ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ा है। पकड़े गए चारों आरोपी लोगों के चेक की डिटेल हासिल करके फर्जी चेक लगाकर उनके अकाउंट से रुपए विड्राॅ करवाते थे। आरोपियों को पुलिस ने तीन ठगी के मामले में गिरफ्तार किया है हालांकि इस तरह की ठगी की शहर में 11 कम्प्लेंट आई हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान राजिंदर सिंह, अशोक कुमार, गुरिंदर सिंह और ताहिर महमूद के रूप में हुई है। इस मामले में अभी पुलिस को एक अन्य आरोपी की तलाश है। राजिंदर सिंह, अशोक कुमार और ताहिर महमूद 24 मई तक पुलिस रिमांड पर हैं। जबकि गुरिंदर सिंह को ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया गया है। दरअसल चेक से ठगी की तीन शिकायतें सेक्टर-17 थाना पुलिस के पास आई थीं। इसके बाद जांच का जिम्मा सब-इंस्पेक्टर कुलदीप के पास आया। सब इंस्पेक्टर को आरोपियों का क्लू लगा और उन्होंने काॅन्स्टेबल सुखप्रीत के साथ मिलकर उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद पूछताछ की गई जिसमें कई खुलासे हुए।

बड़ी कंपनी के मालिक हैं शिकायतकर्ता: पुलिस को चंडीगढ़ की एक ऑटोमोबाइल कंपनी के मालिक एमएस विज और सोलन की एक बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनी के मालिक और एक महिला, जिनका अपना काम है, ने शिकायत दी है। इन सभी का काम चेक से होता था। इन सभी ने कम्प्लेंट दी थी कि उनके अकाउंट से रुपए निकल रहे हैं लेकिन यह कैसे हो सकता है।

पुलिस ने तीन केसों में किए चार अरेस्ट

कैसे करते थे ठगी...

आरोपी लोगों के भरे हुए चेक की फोटो हासिल करते थे। इसमें उनके चेक का अकाउंट नंबर और साइन होते थे। वहीं आरोपियों के पास हर बैंक के चेक पड़े हुए होते थे। वह किसी के चेक की फोटो हासिल करने के बाद उस चेक की डिटेल अपने पास पड़े हुए चेक में भर देते थे। वह अपने पास पड़े हुए चेक पर लिखे हुए अकाउंट नंबर को मिटाते थे फिर उसमें शिकायतकर्ता के चेक का नंबर और अकाउंट नंबर भर देते थे। भरने के बाद वह लाइट के सामने जाली चेक और फोटो वाले चेक को एक साथ रखकर शिकायतकर्ता के साइन को ऊपर से री राइट कर फर्जी चेक में साइन भी कर देते थे। आरोपी जब भी बैंक में चेक लगाते थे तो उसमें 2 लाख या उससे कम रुपए ही भरते थे। इसके पीछे कारण था कि बैंक चेक के लिए कहीं फोन पर वेरिफिकेशन न कर सके। दरअसल इससे ज्यादा की कीमत पर चेक कैश करने से पहले बैंक अकाउंट होल्डर से वेरिफिकेशन करते हैं। आरोपी चेक की फोटो कुरियर बॉय से भी मंगवाते थे। इसके अलावा कई अन्य लोगों से डिटेल हासिल करते थे। राजिंदर के खिलाफ शिमला में भी इसी तरह से ठगी करने का केस दर्ज है।

लोग 20% हिस्से के लालच में दे देते थे डिटेल...

इसके बाद आरोपी शहर के भोले लोगों को भरोसे में लेते थे। यह वह लोग थे जो किसी न किसी तरह से उनके संपंर्क में थे। फिर उन्हें बोलते थे कि कुछ ब्लैक मनी विदेश से आनी है यदि वह अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लगें तो वह उन्हें 20 परसेंट हिस्सा देंगे। जब लोग 20 परसेंट सुनकर उनकी बात मान जाते थे तो वह उनका एटीएम व पिन ले लेते थे और उसके बाद उनके अकाउंट से रुपए निकलवा लेते थे।

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