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पावन पर्व बैसाखी के 5 संदेश ...

3 वर्ष पहले
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बैसाखी के 5 संदेश ...
मंगलकारी | आकाश में ‘विशाखा नक्षत्र’ से शुरू होता है बैसाख महीना
मंगलकारी | आकाश में ‘विशाखा नक्षत्र’ से शुरू होता है बैसाख महीना
ज्योतिष की दृष्टि से बैसाखी बहुत ही मंगलकारी होता है। इस दिन आकाश में ‘विशाखा नक्षत्र’ होता है इसलिये इस दिन से बैसाख महीने की शुरुआत होती है। वहीं, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से इसे मेष सक्रांति भी कहते है। लोग स्नान और पूजा करते हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से बैसाखी बहुत ही मंगलकारी होता है। इस दिन आकाश में ‘विशाखा नक्षत्र’ होता है इसलिये इस दिन से बैसाख महीने की शुरुआत होती है। वहीं, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से इसे मेष सक्रांति भी कहते है। लोग स्नान और पूजा करते हैं।

बै: बैर त्याग दें... सा: साथ आएं सभी... खी: खीवा रहे संसार...
बै: बैर त्याग दें... सा: साथ आएं सभी... खी: खीवा रहे संसार...
बैसाखी यानी सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का पर्व। यह पर्व हमें मनमुटाव दूर करने, मिलजुल कर रहने और खीवा (खुशहाली) का संदेश देता है। इसी दिन खालसा पंथ की भी स्थापना हुई। फसल काटने की शुरुआत होने पर किसान खुशियां मनाते हैं, मेले भरते हैं। मेले होते ही मेल-मिलाप के लिए है। आज आप भले ही मेले में न जा पाएं पर घर से निकलिए, मेल-मिलाप करिए और खुशियां बांटिए।

बैसाखी यानी सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का पर्व। यह पर्व हमें मनमुटाव दूर करने, मिलजुल कर रहने और खीवा (खुशहाली) का संदेश देता है। इसी दिन खालसा पंथ की भी स्थापना हुई। फसल काटने की शुरुआत होने पर किसान खुशियां मनाते हैं, मेले भरते हैं। मेले होते ही मेल-मिलाप के लिए है। आज आप भले ही मेले में न जा पाएं पर घर से निकलिए, मेल-मिलाप करिए और खुशियां बांटिए।

, चंडीगढ़

, चंडीगढ़

भयमुक्त | अत्याचार के अंत के लिए खालसा पंथ की स्थापना हुई
भयमुक्त | अत्याचार के अंत के लिए खालसा पंथ की स्थापना हुई
13 अप्रैल,1699 को बैसाखी के दिन ही श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने ‘खालसा पंथ’ की स्थापना कर मुगल शासकों के अत्याचार को समाप्त किया और तभी से नाम के आगे ‘सिंह’ लगाने की परंपरा शुरू हई।

13 अप्रैल,1699 को बैसाखी के दिन ही श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी ने ‘खालसा पंथ’ की स्थापना कर मुगल शासकों के अत्याचार को समाप्त किया और तभी से नाम के आगे ‘सिंह’ लगाने की परंपरा शुरू हई।

शनिवार, 14 अप्रैल, 2018

शनिवार, 14 अप्रैल, 2018

सद्‌भावना | गुरु गोबिंद सिंह ने भिन्न जाति के ‘पंज प्यारों’ को सजाया
सद्‌भावना | गुरु गोबिंद सिंह ने भिन्न जाति के ‘पंज प्यारों’ को सजाया
‘दया सिंह, धर्म सिंह, मोहकम सिंह, साहिब सिंह व हिम्मत सिंह’ ने पंथ की स्थापना के लिए अपने शीश भेंट किए। गुरु गोबिंद सिहं ने सभी को एक ही अमृत पात्र से अमृत छका ‘पांच प्यारे’ सजाए। ये पांच प्यारे भिन्न-भिन्न जाति और स्थान के थे।

‘दया सिंह, धर्म सिंह, मोहकम सिंह, साहिब सिंह व हिम्मत सिंह’ ने पंथ की स्थापना के लिए अपने शीश भेंट किए। गुरु गोबिंद सिहं ने सभी को एक ही अमृत पात्र से अमृत छका ‘पांच प्यारे’ सजाए। ये पांच प्यारे भिन्न-भिन्न जाति और स्थान के थे।

परंपरा | गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपीं
परंपरा | गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपीं
मानव कल्याण के लिए पिता, गुरु तेग बहादुर साहिब मां और चारों बेटों का बलिदान करने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपी और व्यक्ति विशेष की अराधना ही निषिद्ध कर दी।

मानव कल्याण के लिए पिता, गुरु तेग बहादुर साहिब मां और चारों बेटों का बलिदान करने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपी और व्यक्ति विशेष की अराधना ही निषिद्ध कर दी।

आभार | कल्याण और समृद्धि के लिए किसान ईश्वर को धन्यवाद देते हैं
आभार | कल्याण और समृद्धि के लिए किसान ईश्वर को धन्यवाद देते हैं
बैसाखी रबी फसल के पकने का प्रतीक है। पंजाबी लोग इसे ‘फसल कटाई त्योहार’ के रूप में मनाते हैं। किसान इसे ‘धन्यवाद दिवस’ के रूप में भी मनाते हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि प्रचूर मात्रा में उपजी फसल के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।

बैसाखी रबी फसल के पकने का प्रतीक है। पंजाबी लोग इसे ‘फसल कटाई त्योहार’ के रूप में मनाते हैं। किसान इसे ‘धन्यवाद दिवस’ के रूप में भी मनाते हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि प्रचूर मात्रा में उपजी फसल के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।

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