पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • इंजीनियर डॉक्टर नहीं, खेती को बनाया करियर, कमाई लाखों में

इंजीनियर-डॉक्टर नहीं, खेती को बनाया करियर, कमाई लाखों में

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कहते हैं करो नौकरी सरकारी, नहीं तो बेचो तरकारी। इसी को अपना निश्चय मानकर चोरेया के नंदकिशोर साहू ने आईएससी करने के बाद किनान बनने को ठानी। अच्छे मार्क्स आने के बाद भी डॉक्टरी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बजाए खेती और उससे जुड़े उपकरणों की पढ़ाई की। आज उनका निश्चय रंग ला दिया। वे पिछले आठ साल से खेती कर रहे हैं। साल भर खेती कर इससे अच्छी कमाई भी कर रहे हैं।

इनकी सफलता को देख गांव के कई लोग नंदकिशोर को प्रेरणा मान रहे हैं। वहीं, सरकार भी नंदकिशोर को प्रोत्साहित कर रही है। यदि इसी तरह किसान खेती करता रहे तो 2022 तक किसानों की आय निश्चित रूप से दुगुनी हो जाएगी। युवा किसान कहते हैं कि सफल किसान बनने के लिए शिक्षित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक किसान यदि ईमानदारी से खेती करें, तो वह सम्मान पूर्वक जीवन जी सकता है।

ड्रिप एरिगेशन सिस्टम बना वरदान
नंदकिशोर आठ सालों से खेती कर रहे हैं, लेकिन पिछले एक साल से जब ड्रिप एरिगेशन विधि से खेती करना शुरू किया तो इनकी तकदीर बदल गई। अभी गर्मी के इस मौसम में लगभग पांच एकड़ में इनकी फसल लहलहा रही है। अभी इन्होंने शिमला मिर्च, तरबूज, टमाटर और गोभी लगा रखा है। डीप एरिगेशन से एक ओर जहां पैसे व समय की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर शानदार फसल से अच्छी कमाई भी होती है। नंदकिशोर बताते हैं कि एक एकड़ में फ्लड विधि से शिमला मिर्च की खेती करने में जहां 18000 पौधे लगते हैं, वहीं डीप के साथ मलचिंग का उपयोग करने से एक एकड़ में महज आठ हजार पौधे ही लगते हैं। सबसे ज्यादा बचत पानी की होती है।

एक एकड़ खेती करने में जहां एक लाख लीटर पानी लगता है वहीं, डीप एरिगेशन में एक एकड़ में महज नौ हजार लीटर से सिंचाई की जा सकती है। समय की भी काफी बचत होती है। साधारण खेती को पटवन करने में जहां 10 से 11 घंटे का समय लगता है, वहीं ड्रिप विधि से महज 40 मिनट में एक एकड़ की सिंचाई की जा सकती है।

खुद बनाते हैं जीवा अमृत दवा
नंदकिशोर पौधे को देने के लिए जीवा अमृत नामक दवा खुद बनाते हैं, जो पौधों के लिए अमृत के समान होता है। बेसन, गो-मूत्र, गुड़, गोबर और बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी को मिलाकर दवा बनाते हैं। इस दवा से बैक्टिरिया पैदा होता है, जो पौधों के लिए अमृत के समान होता है। इससे पौधा पुष्ट होता है और पैदावार अधिक होती है।

निश्चय
आईएससी के बाद नंदकिशोर खेती करने को ठानी, आज ड्रिप एरिगेशन से खेती कर दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बने
अब नंदकिशोर के बच्चे लाने लगे हैं अच्छे नंबर
नंदकिशोर का पूरा परिवार खेती में उनका मदद करता है। उनकी प|ी मंजु देवी और बड़ा बेटा आशिष कुमार खेती में सहयोग करते हैं। पहले जब नंदकिशोर फ्लड विधि से खेती करते थे तो पटवन में काफी समय लग जाता था, इससे उनके बेटे आशिष को पढ़ाई करने का समय नहीं मिल पाता था और वह होमवर्क नहीं कर पाता था। लेकिन अभी जब से ड्रिप एरिगेशन विधि से खेती शुरू की है, तब से आशिष की पढ़ाई करने का समय मिल गया है और उसका रिजल्ट भी सुधर गया है। इससे उनका परिवार काफी खुश है। नंदकिशोर सालों भर खेती करते हैं। मटर, आलू, अदरक, ओल, गोभी, टमाटर को ठंडा के मौसम में जबकि गर्मी में तरबूज, शिमला मिर्च, टमाटर व गोभी की खेती करते हैं।

मशरूम की खेती करने को लेकर उत्साहित
नंदकिशोर जल्द ही सब्जी की खेती के साथ-साथ फूलों की खेती करने वाले हैं। उनकी प|ी मशरूम की खेती करने को उत्सुक है। कृषि विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त कर मंजु देवी जल्द ही मशरूम की खेती शुरू करेंगी। नंदकिशोर एक पढ़ा-लिखा प्रगतिशील किसान है। ऐसे किसान को विभाग प्रोत्साहित करता है। उन्हें विभाग द्वारा हरसंभव मदद दी जाती है। आगे भी नंदकिशोर को कृषि विभाग द्वारा हरसंभव मदद दी जाएगी। पहले भी 90 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप लगाया गया है। -बिंदु कुजूर, बीटीएम, चान्हो

खबरें और भी हैं...