बेयासी पंचायत के गोके गांव में मनरेगा के नियम-कानून को ताक पर रखकर कूप का निर्माण किया जा रहा है। दलाल इस कदर हावी हैं कि लाभुक को अपने कुआं में काम कर रहे मजदूरों का नाम भी पता नहीं है। हद तो तब हो गई जब कूप में बाल मजदूर काम करते देखे गए। हालांकि कैमरा निकालते ही उसे कुआं के पास से भगाने का प्रयास किया गया। लेकिन पूछने पर युवक ने अपना नाम व पता बताया। वहां मनरेगा कानून की धज्जियां उड़ाते हुए बाल मजदूरी कराया जा रहा है। साथ ही सरिया के स्थान पर बांस का रिंग बनाकर ढलाई किया जा रहा था। गोके गांव की दूरी प्रखंड मुख्यालय से लगभग 15 किमी है। दूर स सुदूर ग्रामीण इलाका होने के कारण जेई, एई व रोजगार सेवक कार्यस्थल पर नहीं जाते है। और गांव में सक्रिय दलाल इसका फायदा उठाते हुए मनमाफिक काम कराते हैं।
शुक्रवार को ग्रामीणों के आग्रह पर दैनिक भास्कर प्रतिनिधि मामले की हकीकत जानने गोके गांव पहुंचे थे-सिबन उरांव के खेत में कूप का निर्माण कार्य चल रहा था। 10-12 पुरुष व महिला मजदूर काम कर रहे थे। चार-पांच पुरुष बांस का रिंग बनाकर ढलाई के लिए नीचे उतारने ही वाले थे कि कैमरा देखकर बांस के बल्ली को नीचे फेंक देते हैं। पूछने पर बताया कि रिंग की मापी के लिए बांस का बल्ली बनाया गया था। वहां मौजूद पाहन ने बताया कि बांस का बल्ली सरिया से ज्यादा मजबूत होता है। वहां काम कर रही एक लड़की ने बताया कि उसका उम्र 16 साल है, जॉब कार्ड भी नहीं है। फिर भी काम कर रही है। कुछ ही दूरी पर स्थित भोला महली के कूप निर्माण को देखा। वहां काम बंद था। शायद रिपोर्टर के आने की खबर के बाद सभी लोग काम छोड़कर भाग गए थे। वहां बांस का रिंग ढाल कर ऊपर पत्थर से पटाई भी कर दिया गया है।
इसके बाद मगन उरांव के खेत में हो रहे कूप निर्माण को देखा, वहां खुदाई लगभग समाप्त था। कुआं में 13-14 साल का एक बाल मजदूर काम कर रहा था। हालांकि फोटो खिंचने के नाम पर उसे भगाने का प्रयास किया गया। संतोष उरांव नामक वह नाबालिग मंगरा उरांव का बेटा है।
मनरेगा कानून के विपरीत सरिया के स्थान पर बांस से हो रही है रिंग ढलाई, बाल मजदूर कर रहे हैं काम।