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बारिश में कुएं और बोर का अतिरिक्त पानी मोटरों से तालाब में डाला, गर्मी तक 30 बीघा में ली तीन फसलें

3 वर्ष पहले
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जिला इस बार अल्पवर्षा के कारण जलसंकट जूझ रहा है, सारे तालाब सूखे पड़े हैं, भूजल स्तर तक 600 फीट तक जाने से पेयजल तक के लाले हैं, ऐसे में चापड़ा के किसान प्रहलाद पाटीदार का निजी तालाब आज भी लबालब है। वे तीसरी फसल लेने की तैयारी कर चुके हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने बारिश के वक्त बोर और कुएं में जो अतिरिक्त पानी रहता था, उसे यूं ही छोड़ने के बजाय मोटरें चलाकर एक तालाब में डलवाना शुरू कर दिया। यह तालाब उनके खेत में ही 20 फीट गहरा खुदवाया गया है जो जमीन के अंदर 8 फीट गहरा खुदवाया है और सतह से तालाब के चहुंओर 12 फीट ऊंची पाल बनवा रखी है। इसमें मोटरों से बारिश में पानी भरते गए और रबी सीजन से इस पानी का उपयोग शुरू कर दिया। 20 फीट के इस तालाब से 30 बीघा में सिंचाई कर पा रहे हैं, अभी भी इसमें 8 फीट गहरा पानी भरा हुआ है। जबकि आसपास के इलाकों में सिंचाई तो दूर, आम लोगों व मवेशियों के लिए पीने तक का संकट है।

 

900 घंटे मोटर चलाकर डाला पानी

किसान प्रहलाद ने अपने खेत पर निजी खर्च से साढ़े नौ लाख रु. खर्च कर तालाब बनवाया था। इसके बाद तालाब के तल से लेकर पाल तक में प्लास्टिक को सतह की तरह बिछवा दी। इसके बाद बारिश में कुएं में भरे पानी और खेत के ट्यूबवेल से इसमें पानी भरना शुरू किया। करीब 900 घंटे मोटर चलाकर इसे भरा गया। अब गर्मी में वाष्पीकरण से बचाने के लिए थर्माकोल बिछा देते हैं।

कभी जमीन बेचने वाले थे प्रहलाद

किसान प्रहलाद ने बताया गर्मी के लिए पानी संग्रहित होने से 30 बीघा में बोवनी करता हूं। तालाब निर्माण में सब्सिडी है लेकिन कम है। प्रहलाद ने बताया पहले मैंने 70-70 फीट गहरे दो कुएं खुदवाए लेकिन नवंबर में ही दम तोड़ देते थे। 700 से 800 फीट तक के गहरे 13 बोर भी करवाए लेकिन पानी नहीं साथ रहा। अंतत: जमीन बेचने को मन बना लिया तो किसी ने महाराष्ट्र के तालाबों की जानकारी दी। वहां पता किया और उसका अनुसरण कर 60 हजार वर्गफीट में तालाब खुदवाया और यह प्रयास सफल रहा।

चापड़ा के इस तालाब में आठ फीट पानी भरा है

पहले प्याज फिर आलू, अब तीसरी बार प्याज की फसल लगाई

30 बीघा जमीन में तीन फसल ले रहे हैं। पहले प्याज लगाया, फिर आलू, अब तीसरी बार प्याज की फसल लगाई है। जबकि अन्य 15 बीघा में गेहूं, 2 बीघा में तरबूज लगाए। अब 7 बीघा में कद्दू की फसल लगाने में जुटे हैं। तालाब में अभी आठ फीट पानी है। ड्रिप सिस्टम से पानी की बचत हो रही है।

करनावद, छतरपुरा व डेरिया साहू में बन रहे ऐसे तालाब

प्रहलाद के खेत में बने तालाब को देखकर 10 तालाब करनावद में बनाए जा रहे हैं। तीन तालाब छतरपुरा, दो तालाब डेरिया साहू व दो तिस्सी गांव के किसान बना रहे हैं। इस मामले में पिछले दिनों सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान के क्षेत्र आगमन पर भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोतीलाल पटेल ने तालाब निर्माण में सब्सिडी बढ़ाने की मांग की थी।

अच्छी पहल है, अन्य किसान भी पानी संग्रह के लिए इसे अपनाएं

यह एक अच्छी पहल है। अन्य किसानों को भी इसे अपनाना चाहिए। इससे पानी को संग्रहित रखा जा सकता है और जरूरत के समय इसका उपयोग हो सकता है। किसान मत्स्य पालन कर अपनी आय वृद्धि भी कर सकते हैं।’ सुरेन्द्रसिंह उदावत, सेवानिवृत्त ग्रामीण कृषि विस्तारक अधिकारी

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