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दादा-दादी, नाना-नानी समाज के वटवृक्ष के समान

3 वर्ष पहले
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इंदुमति टिबड़ेवाल सरस्वती विद्या मंदिर में शुक्रवार को दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वंभर नाथ मिश्र व विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रयाग राम, मुकेश शाह, संतन पांडेय व प्राचार्य पवन कुमार दास उपस्थित थे। अतिथियों ने भारत मां के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के औचित्य पर शिक्षक सच्चिदानंद पाठक ने प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के मौजूदा परिवेश में एक तरफ बच्चे अपने माता-पिता, बुजुर्गों से दूर होकर संस्कारहीन और गलत राह पर जा रहे है। उनकी नैतिकता का लगातार ह्रास हो रहा है। दूसरी तरफ बुजुर्गों का भी अच्छा हाल नहीं है, वे वृद्धाश्रम में शरण ले रहे है। कार्यक्रम के माध्यम से संयुक्त परिवार की कल्पना को बच्चों में डालने का प्रयास करना है। जिससे युवा पीढ़ी ,बच्चें बुजुर्गों के अनुभव का लाभ ले सके। उन्होंने कहा कि दादा दादी,नाना नानी समाज के वटवृक्ष के समान होते है। जहां से संस्कारों की शाखाएं प्रस्फुटित होती है। विद्यालय प्रबंधन समिति के अभिभावक प्रतिनिधि संतन पांडेय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के बदलते परिवेश में एकांकी परिवार के कारण बच्चें परिवार से दूर हो रहे हैं। मुख्य अतिथि विश्वंभर नाथ मिश्र हठयोगी जी ने कहा कि बच्चों को घर के बुजर्गोंं से ही संस्कार की सीख मिलती है। जब बच्चों को बड़े बुजर्गो से सिख भरी कहानियां सुनने का समय आता है तो बच्चे टीवी से चिपके रहते है,दादा दादी की लोरी से बच्चे दूर हो रहे है। कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों के दादा-दादी व नाना-नानी को विद्यालय प्रबंधन की ओर से धार्मिक पुस्तकें उपहार स्वरूप देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।

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