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सीएम विंडो पर खत्म हो रहा है जनता का विश्वास, नहीं मिलता जवाब

3 वर्ष पहले
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प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा आम आदमी के काम नहीं करने और बाद में दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर जनता को राहत प्रदान करने केे लिए भाजपा सरकार में सीएम विंडो के नाम से एक कांउटर खोला गया था। इस कांउटर के खुलने से आम आदमी को लगा था कि उनकी शिकायतों को जो अधिकारी नहीं सुनते अब उन अधिकारियों की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की जा सकेगी और भ्रष्ट सरकारी तंत्र से जनता को कुछ राहत मिलेगी। इस सीएम विंडो का शुरुआती दिनों में कुछ असर देखने को मिला भी लेकिन ज्यों ज्यों समय बीतता गया त्यों त्यों इसका असर खत्म होने लगा और अफसर शाही फिर से अपने उसी पुराने ढर्रे पर आ गई। ऐसा ही एक मामला चीका के वार्ड नंबर नौ हनुमान कालोनी के सुरेश कुमार को देखने में आया है।

सुरेश कुमार ने बताया कि उसने चीका के एक निजी स्कूल में चार वर्षों तक लेक्चरार के पद पर अध्यापन का कार्य किया है। उसे अपना अनुभव प्रमाण पत्र बनवाना था, इसके लिए उसने स्कूल की तरफ से जारी अनुभव प्रमाण पत्र पर स्कूल प्रिंसिपल व स्थानीय बीईओ के साइन करवा डीईओ कैथल के पास लेकर गया। डीईओ कैथल के कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने उसके साथ दुव्र्यवहार किया और बार बार चक्कर लगाने के बावजूद उसके प्रमाण पत्र पर साइन नहीं किए। उसने 13 अप्रैल को सीएम विंडो पर शिकायत की थी लेकिन लगभग सवा माह बीत जाने के बाद भी ना तो उसे सीएम विंडो की तरफ से कोई जवाब मिला है और ना ही डीईओ कार्यालय की तरफ से कोई सुचना आई। यदि सरकार इस विंडो के माध्यम से किसी को राहत नहीं दे सकती तो इसे चालू रखने का औचित्य ही क्या रह जाता है।

गुहला चीका | सुरेश कुमार कर्मचारियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार को लेकर सीएम विंडो पर लगाई गई शिकायत दिखाते हुए।

एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट बनवाने वाले व्यक्ति का पूरा रिकार्ड स्कूल की तरफ से कार्यालय में जमा होना चाहिए। उसका वेतन बैंक खाते द्वारा दिया जाए। सर्टिफिकेट बनवाने वाला व्यक्ति योग्यता यदि पूरी करता है तो कार्यालय की तरफ से तुरंत बना दिया जाता है। सुरेश नाम के व्यक्ति का मामला मेरे नोटिस में नहीं है। राम कुमार, डीईओ कैथल।

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