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8 माह पहले लावारिस हालात में मिली महिला को मिला परिवार, अब अपने घर कटनी पहुंची
लगभग 8 माह पूर्व छतरपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे पर रात में लावारिस हालत में पड़ी मिली 22 वर्षीय आदिवासी महिला राजवती को पुलिस शहर के नरसिंहगढ़पुरवा मोहल्ले में संचालित स्वाधार गृह ले आई थी। राजवती को अपने नाम के अतिरिक्त कुछ भी याद नहीं था, न ही उसे अपने माता-पिता एवं घर के बारे में कोई जानकारी थी। ऐसे में स्वाधार गृह का सहारा राजवती की जिंदगी में वरदान साबित हुआ।
राजवती को यहां पर खाना, कपड़े पहनना, अच्छे से बोलना एवं हस्ताक्षर करना सिखाया गया। कुछ दिनों में राजवती स्वाधार गृह में रहने वाली अपने जैसी अन्य महिलाओं के साथ घुल-मिल गई और एक-दूसरे की देखभाल करना भी उसने सीख लिया। एक दिन ऐसा भी आया जब राजवती ने अपने हुनर के माध्यम से मिट्टी को गुथकर छोटे-छोटे खिलौने बनाने लगी।
स्वाधार गृह में रहने के दौरान एक दिन राजवती ने अपने घर का जिक्र किया और बताया कि वह सलैया में स्थित अपने घर पर माता-पिता के साथ रहती थी, तब स्वाधार गृह के संचालक संजय सिंह ने राजवती को उसके परिवार से मिलाने की ठानी। छतरपुर जिले में सलैया नाम से कई स्थान होने के कारण राजवती का घर ढूंढने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। कई लोगों से बात करने पर मालूम पड़ा कि कटनी जिले के बरही तहसील में सलैया गांव है, जिसका वास्तविक नाम सलैया सिहोरा है, जो कि छतरपुर से 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
छतरपुर। लावारिस हालात में मिली महिला को मिले परिजन।
बच्ची और माता-पिता को पाकर खुश हुई महिला
संस्था के सहयोग से राजवती सलैया सिहोरा रवाना हो गई। प्रयास के बाद राजवती का घर मिल गया और उसने घर पहुंचकर अपने माता-पिता व परिवारजनों को पहचान लिया। अपनी बच्ची राजवती को लगभग 1 साल बाद अपने बीच में पाकर उसके माता-पिता की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले राजवती की शादी पास के ग्राम में कर दी थी। लड़की पैदा होने पर ससुरालवालों ने उसे घर से निकाल दिया था। तब से वह डिप्रेसन का शिकार होने लगी थी और अपनी याददाश्त खोने लगी। पिछले साल बरही तहसील में आयोजित बसंत पंचमी के मेले से वह गायब हो गई थी। बहुत खोजबीन करने के बाद उसके लाचार वृद्ध माता-पिता ने उसे मृत समझ लिया था। अपनी खोई हुई बिटिया को वापस पाकर राजवती के माता-पिता ने भगवान को धन्यवाद दिया और संस्था की सराहना की।