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बोर खनन के लिए 16 करोड़ रु. खर्च; 122 स्कूलों में हैंडपंप से निकल रही हवा, 130 खराब, बच्चे परेशान
प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में नौनिहालों को पानी उपलब्ध कराने के लिए शासन ने बोर खनन करवाए हैं, लेकिन भीषण गर्मी में 817 स्कूलों में बच्चों को पानी नसीब नहीं हो रहा है। जबकि इन पर पीएचई विभाग द्वारा कराेड़ों रुपए खर्च किए हैं। इसके बाद भी बच्चे बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। प्रशासन ने नौनिहालों की इस समस्या से मुंह माेड़ लिया। इससे जहां पीएचई की कार्यप्रणाली और जिला प्रशासन की बच्चों के प्रति मंशा साफ जाहिर हो रही है। इससे बच्चे परेशान है, वहीं कई बच्चे पानी की कमी के चलते स्कूल ही नहीं पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में 1900 प्राइमरी और 754 मिडिल स्कूल है। इस प्रकार कुल 2654 स्कूलों में से 2596 स्कूलों में हैंडपंप के लिए बोर खनन किए गए। इसमें एक बोर में 65 से 70 हजार रुपए तक का खर्च आया है। इस प्रकार जिले में स्कूलों में बोर खनन के नाम पर पीएचई विभाग द्वारा करीब 16 करोड़ 87 लाख रुपए खर्च किए गए। यह करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी स्कूलों में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
बोर करने के बाद पाइप कम डाली, वह भी सुधार में निकाल ली
जिला शिक्षा केंद्र को स्कूलों द्वारा प्राप्त शिकायतों में यह सामने आया कि पीएचई विभाग द्वारा स्कूलों में बोर कराने के बाद वैसे भी पाइप लाइन कम डाली गई। इससे बरसात के दिनों में हैंडपंप चलता रहा, लेकिन हैंडपंप खराब होने के दौरान उसे सुधरवाने के लिए पीएचई के इंजीनियरों को बुलाया, तो उन्होंने फिर शेष पाइपों में से एक-दो पाइप निकाल लिए। इससे अब यह हैंडपंप हवा छोड़ रहे हैं। बच्चों को स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
गड़बड़ीकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं, सर्वे में ही जुटे अफसर : पीएचई के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हैंडपंप खनन में यह पूरा खेल हुआ, जिसमें स्कूलों में खानापूर्ति के लिए ही बोर किया गया। इससे यह बोर अब हवा ही फेंक रहे है। गांव में स्कूलों के बच्चों को उनसे पानी नहीं मिल रहा। नौनिहाल घर से पानी की बॉटल लाने के लिए मजबूर हैं। इस बात की जानकारी उच्चाधिकारियों को है, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शिक्षकों द्वारा लिखित में कई बार शिकायतें भी की गई।
हैंडपंपों के हालातों
पर एक नजर
122 हैंडपंप उत्खनित होने के बाद पानी नहीं
130 हैंडपंप खराब पड़े
200 हैंडपंप सूख गए
116 में पाइप लाइन गायब
199 स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था नहीं
50 अन्य कारणों से बंद हैं
पीएचई ईई बोल- ऐसा नहीं हुआ है
पीएचई ईई एसके जैन का कहना है कि विभाग के कर्मचारियों द्वारा पाइप लाइन नहीं निकाली गई है। जिले में सूखा पड़ा हुआ है। जलसंकट गहराया है। हैंडपंप पानी नहीं दे रहे है और बोर सूख चुके है। इसमें कर्मचारियों का कोई दोष नहीं है। शिक्षकों द्वारा गलत शिकायत की जा रही है।
सहायक यंत्री ने कहा- मौखिक आती हैं शिकायतें
जिला शिक्षा केंद्र के सहायक यंत्री बीके उपाध्याय का कहना है कि स्कूलों में अब पानी की किल्लत है। वहां पर हैंडपंप पानी दे रहे है। पाइप लाइन गायब होने की सूचना स्कूल के शिक्षकों द्वारा मुख्यालय आकर दी जाती है। शिक्षकों द्वारा ही ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है। शिक्षकों का कहना था कि सुधार कार्य के दौरान पाइप गायब किए जाते हैं।