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1500 की रिश्वत लेने वाले नायब तहसीलदार को 4 साल की कैद, न्यायालय ने कहा-भ्रष्टचार गरीबों के शोषण का बन चुका जरिया

3 वर्ष पहले
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विशेष न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने 17 मई को इस मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी नायब तहसीलदार को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आरोपी को चार साल की कठोर कैद के साथ 50 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है। बड़ामलहरा में पदस्थ रहने के दौरान नायब तहसीलदार को लोकायुक्त पुलिस ने 1500 रुपए रिश्वत लेते पकड़ा था। किसान से पेड़ों के कब्जे का पंचनामा बनाने के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी।

बड़ामलहरा क्षेत्र के महाराजगंज गांव के किसान सुरेश कुमार विश्वकर्मा ने 23 मई 2013 को लोकायुक्त पुलिस सागर को शिकायत में बताया था कि फरियादी सुरेश विश्वकर्मा का एक मामला बिजावर की अदालत में चल रहा है। उसके पुस्तैनी खसरा नंबर 716 पर लगे महुआ के पेड़ों के कब्जे के संबंध में पंचनामा बनाने के लिए तहसीलदार एनएस गजौरिया तहसील बड़ामलहरा को सुरेश ने एक आवेदन दिया था। कब्जे का पंचनामा बनाने के एवज में तहसीलदार एनएस गजौरिया ने 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। सुरेश 3 हजार रुपए पहले ही दे चुका है और 2 हजार रुपए देना बाकी है। एनएस गजौरिया 2 हजार रुपए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। अब फरियादी सुरेश तहसीलदार को रिश्वत नहीं देना चाहता है और उसे पकड़वाना चाहता है। 24 मई 2013 को लोकायुक्त पुलिस ने सुरेश को वाईस रिकाॅर्डर देकर तहसीलदार और सुरेश की रिश्वत संबंधी बातों को रिकार्ड कराया।

पुलिस ने 500-500 रुपए के तीन नोटों में फिनाफ्थलीन पाउडर लगाकर सुरेश को दिए और लोकायुक्त पुलिस के साथ तहसीलदार गजौरिया के घर आया। पहले सुरेश ने एनएस गजौरिया के घर अकेला जाकर रिश्वत की राशि तहसीलदार को दे दी। बाहर आकर पुलिस को इशारा किया कि निरीक्षक श्री चतुर्वेदी ने अपने ट्रेप दल के साथ एनएस गजौरिया को पकड़ लिया है। रिश्वत की राशि 1500 रुपए जब्त की है। पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करके आरोपी के खिलाफ रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया और कोर्ट में पेश किया।।

भ्रष्टाचार से कमजोर वर्ग का शोषण

विशेष न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि भ्रष्टाचार के अपराधों से देश में सामाजिक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है। देश के विकास में विपरीत असर पड़ा है। भ्रष्टाचार से ही कमजोर वर्ग का शोषण होता है और भ्रष्टाचार देश के विकास में प्रमुख बाधा हैं। भ्रष्टाचार ही गरीब वर्ग के शोषण का एक जरिया बन चुका है। इसलिए इन मामलों पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए सजा के संबंध में उदारता बरतना कानून की नजर में उचित नहीं है। बल्कि अन्य भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के लिए कठोर दंड दिया जाना न्यायोचित है। वकील लखन राजपूत ने बताया कि विशेष न्यायाधीश श्री गुप्त की कोर्ट ने भ्रष्टाचारी नायब तहसीलदार एनएस गजौरिया को दोषी करार दिया। कोर्ट ने भ्रष्टचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी)/13(2) में 4 चार की कठोर कैद के साथ 25 हजार रुपए जुर्माना और धारा 7 में तीन साल की कठोर कैद के साथ 20 हजार रुपए जुर्माना तथा आईपीसी की धारा 201 में एक साल की कठोर कैद के साथ 5 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई।

लोकायुक्त ने कार्रवाई करके पेड़ों के कब्जे का पंचनामा बनाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी

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