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लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज होने के बाद अब विभाग से मांगा रिकार्ड

3 वर्ष पहले
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महाराजा कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एलएल कोरी लोकायुक्त के जाल में फंसे

अब अागे की कार्रवाई हुई शुरु

भास्कर संवाददाता| छतरपुर

लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा अब उच्च शिक्षा विभाग से रिकार्ड मांगा गया है। इसमें महाराजा काॅलेज में हुई गड़बड़ियों को लेकर आगे की कार्रवाई शुरु कर दी गई है। महाराजा कॉलेज में भी लोकायुक्त पुलिस पहुंच सकती है। शासन की राशि काे ठिकाने लगाने और क्षति पहुंचाने के आरोप में लोकायुक्त पुलिस ने शासकीय महाराजा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एलएल कोरी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करते हुए जांच में लिया था, जिसकी आगे की कार्रवाई शुरु हो गई है। जांच के दौरान प्राचार्य को महाराजा कॉलेज छतरपुर से हटाने की मांग भी लोकायुक्त को पत्र लिखकर की गई है। इसमें लोकायुक्त ने पत्र विभाग को भेज दिया।

गौरतलब है कि लोकायुक्त पुलिस भोपाल ने शासकीय महाराजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय छतरपुर के प्राचार्य डॉ लखनलाल कोरी के विरुद्ध जा.प्र.994/17 प्रकरण पंजीबद्ध किया है। इसकी सूचना पत्र के माध्यम से लोकायुक्त पुलिस कार्यालय के विधि सलाहकार-5 एनके शुक्ला ने पत्र क्रमांक 10210/जा.प्र.994/17 के माध्यम से शिकायतकर्ता को दी थी। इसके बाद विधि सलाहकार एनके शुक्ला ने विभाग को भी पत्र लिखा है। मामले में अब कार्रवाई तेजी पकड़ रही है। वहीं कॉलेज में दस्तावेजों काे सुधारने के उपाय देखे जा रहे है। जबकि सत्यापित दस्तावेज पहले से ही शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत कर दिए गए है।

अब विभाग से रिकार्ड आने के बाद ही तत्काल ही आगे की कार्रवाई होगी। इसमें करीब दो दर्जन प्राध्यापकों ने नियम विरुद्ध तरीके से वेतनवृद्धि का लाभ लिया था। वर्तमान में ट्रेजरी द्वारा रिटायर होने वाले प्राध्यापकों से करीब तीन लाख की रिकवरी की जा रही है। प्राचार्य जानबूझकर करीब दो दर्जन प्राध्यापकों से वसूली नहीं कर रहे है, जिससे शासन को करीब 75 लाख रुपए की क्षति हो रही है।

सहायक प्राध्यापकों से अब

तक नहीं कर रहे वसूली

कॉलेज के एक दर्जन सहायक प्राध्यापकों का प्रवर श्रेणी वेतनमान एवं चतुर्थ पे बैंड की तिथि बढ़ा दी गई थी, लेकिन प्राचार्य ने वेतन कम किए बिना ही 1 जनवरी 06 से देय एरियर की तीनों किश्तों का भुगतान कर दिया। इससे शासन को करोड़ों रुपए की क्षति हुई है। इस मामले को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन प्राचार्य द्वारा सहायक प्राध्यापकों से वसूली नहीं की जा रही है। प्राचार्य बार-बार यह कह रहे है कि कोई गड़बड़ी या नियमविरुद्ध तरीके से भुगतान नहीं किया गया, जबकि रिटायरमेंट पर इन कर्मचारियों को जिला कोषालय में यह राशि जमा करनी पड़ रही है। इससे यह पूरी गड़बड़ी उजागर हो रही है। लोकायुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

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