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हम मां भारती के लाल वतन के मुरीद हैं...: अनवर साहिल

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| बड़ामलहरा

नवजाग्रति संस्थान बड़ामलहरा के तत्वावधान में कवि स्व.बाबूलाल गुप्तेश की पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में छतरपुर एवं टीकमगढ़ जिले के कवियों ने अपनी समसामयिक रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। डा. बहादुर सिंह परमार ने बुंदेली भाषा को संरक्षित करने पर बल दिया।

गोष्ठी की शुरुआत अनवर साहिल टीकमगढ़ ‘मां भारती के लाल वतन के मुरीद हैं। एक दो नहीं हम बहुत से शहीद हैं, पढ़कर की। डा. अवध किशोर जड़िया ने कहा- बंदऊं रज शारदा सगुन की , शोभा त्रिभुवन की और छत्रसाल धरती के हीरा पन्ना के पानी के, हम कवि बुंदेली वानी के। शिवभूषण सिंह गौतम ने कहा-प्यार का रागी बागी होता है। राजीव नामदेव राना लिधौरी की रचना ‘क्या पता कब कौन काम आ जाए, हर शख्स से दोस्ती रखा करो, पढ़ी। बीके गुप्ता हिंद ने ग़ज़ल ‘किसी इंसान का भरोसा टूट जाता है , भले ठंडी हवाएं हों पसीना छूट जाता है’ पढ़कर तालियां बटोरीं। गुलाब सिंह भाऊ की बुंदेली रचना ‘इनसे सदा बरक के राने जो सुख तन में चाने, पढ़ी। देवदत्त द्विवेदी ने बुंदेली रचना ‘विंध्यवासिनी माई को सुमरों दोनों करजोर , भ्रष्टाचारी देश के सबरे लेव बटोर’ पढ़ी।

वेद गुपता ने कविता पाठ

से किया मंत्रमुग्ध
स्व. बाबूलाल गुप्तेश जी के नाती वेद गुप्ता ने अपने कविता पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर तालियां बजाने को मजबूर कर दिया। इसके पूर्व गोष्ठी मे मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सीताराम असाटी, वैश्य महासम्मेलन के ब्लाक अध्यक्ष नरेंद्र असाटी, भरत लाल अग्रवाल अनुज एवं संस्थान के सदस्यों अतिथियों एवं कवियों का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन आकाशवाणी उद्घोषक मनोज तिवारी ने किया।

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