तालाब में ही लगाया आरओ प्लांट, बिक रहा लाखों रु. का पानी
शहर के तालाब अब सुरक्षित नहीं है। प्रताप सागर तालाब को युवाओं ने संवारा, तो अब उस पानी की व्यवसायीकरण किया जा रहा है। वैसे तो किशोर सागर तालाब के पास भी एक आरओ प्लांट लगा हुआ है, लेकिन यहां तो हद हो गई। इसमें तालाब के ही डूब क्षेत्र में निर्माण के बाद आरओ प्लांट लग गया। पानी का यह व्यवसाय जोरों पर चल रहा है। इस बात की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को होने के बाद वह चुप्पी साधे हुए है।
गौरतलब है कि प्रताप सागर तालाब में गर्मी के दिनों में भी भरपूर पानी भरा हुआ है। प्रताप नवयुवक संघ के युवाओं ने जुटकर तालाब को संवारा और अब तालाब आकर्षक दिखता है, लेकिन इसी तालाब की सीढ़ियों के बाजू से ही आरओ प्लांट लग गया। जिस स्थान पर यह आरओ प्लांट लगा हुआ है। वह पूरा डूब क्षेत्र है। पावन पेयजल एटी एक्वा मिनिरल्स के नाम से शहर में पानी सप्लाई भी हो रहा।
तालाबों को सुरक्षित नहीं कर पा रहा प्रशासन
एक ओर किशोर सागर तालाब में मौका पाते ही अतिक्रमणकारी पुराव करने में जुट जाते है। इससे डूब क्षेत्र में हजारों ट्रॉलियां मिट्टी डल चुकी है। वहीं अब प्रताप सागर तालाब में भरपूर पानी होने से आरओ प्लांट चल रहा है। शहर में इस तरह के कई आरओ प्लांट धड़ल्ले से नियमों के विरुद्ध चल रहे हैं और प्रशासन व खाद्य विभाग इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है। पावन पेयजल के नाम से हजारों लीटर पानी रोजाना बिक रहा।
शहर में गहराया जलसंकट
शहर में जलसंकट गहराया हुआ है और इधर पानी का व्यवसाय जोरों पर चल रहा है। यहां पर तालाब होने के कारण जलसंकट न होगा, इस बात को ध्यान में रखते हुए ही आरओ प्लांट लगाया गया है। लबालब भरे हुए इस तालाब का वाटर लेवल भी कम हो रहा है। अधिकारियों को इस बात की तनिक भी चिंता नहीं है और वह धड़ल्ले से आरओ प्लांट संचालित कर पानी का व्यवसाय कर रहा है।
जांच कराकर करेंगे कार्रवाई
एसडीएम रविंद्र चौकसे का कहना है कि जल स्रोतों को खत्म नहीं होने देंगे और यदि प्रताप सागर तालाब के नजदीक इस प्रकार का आरओ प्लांट संचालित किया जा रहा है, तो गलत है। मैं शीघ्र ही मामले को दिखवाता हॅू और जांच करने के बाद गड़बड़ी पाए जाने पर आरओ प्लांट को सील किया जाएगा।