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प्रेरकों ने नियमितिकरण की मांग को लेकर सभी तहसील कार्यालय में किया प्रदर्शन
साक्षर भारत योजनांतर्गत कार्यरत साक्षरता संविदा प्रेरकों ने साक्षरता संविदा प्रेरक मोर्चा मप्र के बेनर तले मंगलवार को जिले के सभी विकासखंडों में संविदा की श्रेणी में रखते हुए नियमितिकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम और तहसीलदारों को सौंपे।
मोर्चा के मीड़िया प्रभारी संदीप गुप्ता ने बताया कि प्रदेश कार्यकारिणी के आह्वान पर छतरपुर जिला के सभी तहसील कार्यालयों में ब्लाक अध्यक्ष के नेतृत्व में साक्षर भारत योजना के अंतर्गत कार्यरत प्रेरकों को संविदा श्रेणी में रखते हुए नियमितिकरण करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि राज्य शिक्षा केंद्र पुस्तक भवन बी बिंग अरेरा हिल्स भोपाल का पत्र नंबर 2016/1052, दिनांक 30 मई 16 के तहत मप्र में कार्यरत 23930 संविदा साक्षरता प्रेरकों को वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 5146288 को नवसाक्षर करने का लक्ष्य रखा गया। 28 मार्च 18 को अंतिम नवसाक्षर परीक्षा तक प्रेरकों ने 5089108 को नवसाक्षर किया। प्रदेश से निरक्षरता एक अभिशाप को समाप्त करने के निरंतर प्रयास किए। आदेश के अनुसार 5089108 को नवसाक्षर यानि तीसरी कक्षा का दर्जा तो दे दिया है, लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त शिक्षा नहीं है। उन्हें पत्र के अनुसार समतुल्यता की आवश्यकता है। इसके बाद औपचारिक शिक्षा से जोड़ना, जीवन कौशल का विकास करना, ताकि उनके जीवन स्तर में उन्नति अाैर जीवकोपार्जन के संसाधनों का विकास हो सके।
मार्चा जिलाध्यक्ष राजेश अहिरवार ने बताया कि यदि हम संविदा साक्षरता प्रेरकों की सेवाएं बहाल कर नियमित नहीं किया गया तो हम ग्राम पंचायत से लेकर राजधानी भोपाल में आंदोलन करने को विवश हो जाएंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन, प्रशासन की होगी। इस दौरान मोर्चा के प्रदेश संरक्षक रामप्रकाश गुप्ता, जीतेंद्र सिंह घोष, कृष्ण कुमार पटेल, राजेश अहिरवार, संदीप गुप्ता, रिक्की सिंह, महेश प्रजापति, राजाबेटा पटेल, हरनारायण पटेल, मुकेश मिश्रा, रामेस्वर दुबे, सहदेव यादव, पदमजा, पुष्पा तिवारी, बाबूलाल अहिरवार, कालीचरण अहिरवार, सोभन अहिरवार, कुवर देवी, रफीक खान, फूला कुशवाहा, हरीशंकर तिवारी, बाबूलाल पाल सहित सभी ब्लाकों के प्रेरक मौजूद रहे।
केंद्र और प्रदेश की योजनाओं को भी चलाते हैं: इसके अतिरिक्त प्रेरक राज्य सरकार अाैर केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के दायित्व जैसे बूथ लेबल अधिकारी बीएलओ का कार्य, मन की बात का रेडियो प्रसारण, सूचना खिड़की, शौचालय का निर्माण व हितग्राही को शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित करने का कार्य, चुनाव में ड्यूटी का कार्य, शासन की महत्वाकांक्षी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी हितग्राही को देने का कार्य, ग्राम पंचायत में सर्वे का कार्य हमारे माध्यम से किए जाते हैं।
छतरपुर। प्रेरक संघ ने सौंपा ज्ञापन।
66.6 रुपए प्रतिदिन
मिलता हैं मानदेय
शासन द्वारा प्रेरकों को मानदेय नाम पर सिर्फ 2000 रुपए प्रतिमाह यानि 66.66 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलता है। जो कि मप्र शासन द्वारा निर्धारित कृषि मजदूरों से भी कम है। साक्षर भारत योजना के तहत सभी प्रेरक की नियुक्ति मप्र शासन के नियमानुसार राज्य शिक्षा केंद्र पुस्तक भवन बी विंग अरेरा हिल्स भोपाल के पत्र अनुसार की गई है। जिसमें मप्र में संचालित साक्षर भारत योजनांतर्गत 42 जिलो में जिला प्रौढ़ शिक्षा कार्यालय के तहत पंचायत स्तर पर स्वीकृत प्रति पंचायत प्रौढ़ शिक्षा केंद्र स्थापित किए गए है। जिसमें प्रौढ़ केंद्र के तहत प्रेरक के दो पद प्रदेश शासन ने स्वीकृत किए हैं। जिसमें 1 पद अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति या अल्पसंख्यक वर्ग का है। मध्यप्रदेश लोक सेवा के आरक्षण नियम 1998 के नियम 4 के तहत रोस्टर प्रणाली राज्य शिक्षा केंद्र के अनुसार लागू की गई है। एक पद अनारक्षित श्रेणी हेतु रखा गया, यह पद संविदा आधार पर स्वीकृत किए गए हैं।