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युवतियाें ने सीखे डेथ पंच से खुद काे सुरक्षित रखने के गुर

3 वर्ष पहले
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बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडयम स्थित जूड़ो हॉल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के द्वारा छात्राओं में आत्मविश्वास की कमीं को दूर करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रीष्मकालीन साप्ताहिक आत्मरक्षा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में छात्राओं को जूड़ो कराटे का अभ्यास कराते हुए किसी भी विपरीत परिस्थित का डट कर सामना करने के प्रति प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साेमवार काे युवतियाें ने डेथ पंच का अभ्यास किया। इसका इस्तेमाल किसी बदमाश की सीने पर हमला करके उसे सबक सिखाने में इस्तेमाल किया जाता है।

शिविर के तीसरे दिन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नाथू ताई ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि जबतक छात्राओं में विपरीत परिस्थितियों से निपटने का साहस नहीं होगा तबतक वह अपना पूरी तरह से विकास नहीं कर सकती। साहस ही किसी छात्रा को उसकी हर मंजिल तक पहंुचाने में सहयोग कर सकता है।

विद्यार्थी परिषद की प्रांत कार्रकारिणी सदस्य अंकिता विश्वकर्मा ने छात्राओं से कहा कि समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका काफी अहम है। आज की नारी जब किसी बात के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं। तो अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों का मुंह क्यों देखे। वह कहती हैं कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी।

शिविर के तीसरे दिन जूड़ो कराटे का कराया गया अभ्यास, 45 लड़कियां ले रही ट्रेनिंग

छतरपुर। जूड़ो कराटे सीखती लड़कियां।

हमेशा रहती है अपनी सुरक्षा की फिक्र

शिविर में प्रशिक्षण ले रही रक्षा तिवारी, शिवांगी तिवारी, अंजली शर्मा, रानी कुसवाहा, रूपा रजक कहती हैं कि जूड़ो कराटे का प्रशिक्षण लेकर हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा। हमें कॉलेज आते जाते मनचलों की छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है, लेकिन कराटे सीखने के बाद हम जरूरत पड़ने पर उनको सबक सिखा सकते हैं। किसी भी मनचले को जब यह पता चलेगा कि कोई युवती कराटे जानती है तो वह कुछ भी करने से पहले 100 बार सोचेगा। एक सप्ताह के इस प्रशिक्षण में युवतियों को छेड़छाड़ और हमले की स्थिति में निपटने के तरीके बताए जा रहे हैं। इसमें मास्टर ट्रेनर शंकर रैकवार और शत्रुघन सोनी के द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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