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नोटशीट पर सेवा समाप्ति का लेख होने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, सेवा अवधि बढ़ी नहीं, फिर भी मजे से नौकरी कर रहे दोषी उपयंत्री

3 वर्ष पहले
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उपयंत्रियों की गड़बड़ी सामने आई है। उन्हें गड़बड़ी के मामले में दोषी ठहराया अन्य विभागों के प्रमुख अधिकारियों द्वारा जांच की गई। जिसमेें तत्कालीन जिपं सीईओ ने नोटशीट पर संविदा समाप्त करने का लेख किया फिर भी इन तीन उपयंत्रियों को बचाने में अधिकारी जुटे हैं। दोषियों पर कार्रवाई न होने से अन्य गड़बड़ीकर्ताओं के हौसले बुलंद है और वह गड़बड़ी करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। जिला स्तर से पीएचई ईई और आरईएस ईई द्वारा पूरे मामले की जांच की गई थी। इसके बाद जांच रिपोर्ट में नोटशीट पर इन्हें दोषी ठहराया गया, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यह सवाल खड़ा हो रहा है।

गौरतलब है कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिला शिक्षा केंद्र व विकासखंड शिक्षा केंद्र में पदस्थ तीन उपयंत्रियों में अजय गुप्ता, आरके तिवारी अौर कामता प्रसाद नायक की लापरवाही सामने आई है। इसमें उनके विरुद्ध वसूली के आदेश भी हुए हैं। इसमें मुख्य रूप से नोटशीट पर सेवा समाप्ति का लेख किया गया है, जबकि यह तीनों दोषी उपयंत्री आज भी मजे से नौकरी कर रहे हैं। इस बात से जिले के सभी अफसर अवगत हैं, फिर भी कार्रवाई करने से पीछे हट रहे हैं। यह पूरी नोटशीट तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ के हस्ताक्षर से चली थी।

अतिरिक्त कक्षों के निर्माण में किया था घोटाला

तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर ग्राम पंचायत देवरा के अंतर्गत प्राइमरी स्कूल भवन देवरा वर्ष 2011-12 में निर्माण हुए अतिरिक्त कक्षों की जांच हुई। इसमें निर्माण की गुणवत्ता ठीक न होने और घटिया निर्माण के लिए उपयंत्रियाें काे जिम्मेदार सिद्ध किया गया है। साथ ही अजय गुप्ता उपयंत्री द्वारा मॉनीटरिंग कार्य में लापरवाही करना सामने आया। यह भी पाया गया कि प्रथम किश्त की राशि का उपयोग किए जाने का मूल्यांकन करते हुए वरिष्ठ कार्यालय को गुमराह कर द्वितीय किश्त की राशि जारी करवाई गई। जबकि निर्माण कार्य में प्रथम किश्त की राशि का उपयोग होना भी नहीं पाया गया था।

गुरसारी में बने भवनों में की गड़बड़ी : गुरसारी में भवन निर्माण के मामले में उपयंत्री आरके तिवारी भी लिप्त है, जिनको दोषी ठहराया गया। जबकि इनके विरुद्ध आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भवन निर्माण में गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग करना और टूट फूट होना सिद्ध हुआ। वहीं शौचालय निर्माण कार्य में भी लापरवाही सामने आई, जिसकी रिपोर्ट जांच अधिकारियों ने तत्कालीन जिपं सीईओ के समक्ष पेश की। अब नोटशीट कहां कैसे घूम रही है, इस बात को लेकर विभाग में चर्चा बनी हुई है।

बैठक तो हुई, पर अधिकारियोें ने कार्रवाई टाली : जिला पंचायत में जिला नियुक्ति समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 65 संविदा कर्मचारियों की सेवा अवधि बढ़ाई गई। बैठक में ही इन उपयंत्रियों का मामला सामने आया और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए, इसी दौरान अफसरों ने इस बैठक को खत्म कर दिया और मामले में बाद में कार्रवाई करने की बात कही।

आठ साल पहले का है मामला

ईई आरईएस द्वारा नौगांव क्षेत्र के ग्राम स्थित अतिरिक्त कक्ष गर्रापुरवा, मिडिल स्कूल भवन लहर, अतिरिक्त कक्ष गुरसारी और हेडमास्टर कक्ष ग्राम गुरसारी की जांच कराई गई, जिसमें प्रतिवेदन भी तत्कालीन ईई ने अधिकारियों के समक्ष पेश किया। इसमें प्राइमरी स्कूल गर्रापुरवा वर्ष 2009-10 में दो अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए गए। इसमें तत्कालीन उपयंत्री कामता प्रसाद नायक द्वारा कार्य कराया गया। इसमें छत से पानी टपकना और दूसरे अति. कक्ष प्लर लेबल से बीम तक दीवार में क्रेक पाया गया। भवन में फर्स भी क्रेक था। इसी तरह मिडिल स्कूल भवन लहर वर्ष 2010-11 में स्वीकृत किया गया। जांच प्रतिवेदन के अनुसार कंक्रीट कम स्टेंथ की कॉलम में 10 व 12 एमएम की सरिया का उपयोग किया गया। हेडमास्टर कक्ष का छज्जा टूट कर गिर गया। इसके अलावा अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य गुरसारी में यही लापरवाही सामने आई।

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