अक्षय तृतीया प्रताप सागर तालाब से निकली सामूहिक बारात
नगर पालिका छतरपुर में इस साल मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत जिले का सबसे बड़ा और सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ। बुधवार को हुए इस विवाह सम्मेलन में 6 घंटे में 511 जोड़ों के विवाह हुए। इनमें 7 विकलांग जोड़ों के साथ ही 12 जोड़ों के निकाह भी पढ़े गए। प्रताप सागर तालाब के पास स्थित चौपाटी से सामूहिक बारात निकाली गई।
इस दौरान एक बग्घी पर करीब 11 दूल्हे बैठे। लोग अधिक होने से बग्घी के घोड़े भड़क गए। दूल्हे जान बचाकर बग्घी से उतरकर भागे। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। प्रताप सागर तालाब से शुरू हुई बारात का नगर पालिका परिसर में स्वागत हुआ। नगर पालिका अध्यक्ष अर्चना सिंह ने सभी जोड़ों का तिलक किया। इसके बाद मंच पर नवदंपतियों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई। कई नवदंपतियों ने स्टेज पर एक-दूसरे को वरमाला पहनाने के बाद नृत्य किया और विवाह सम्मेलन का भरपूर लुत्फ उठाया। नपा अध्यक्ष और भाजपा जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने भी बारातियों के साथ नृत्य किया। समारोह के दौरान कलेक्टर डीके मौर्य, उपसंचालक सामाजिक न्यायाय, नगर पालिका उपाध्यक्ष कमला खरे, मुख्य नगर पालिका अधिकारी हरिहर गंधर्व, भारत स्वाभिमान न्यास के उपेंद्र प्रताप सिंह ने नवदंपतियाें काे बधाइयां दीं।
सामूहिक बारात में घोड़े भड़के तो बग्घी से जान बचाकर भागे दूल्हे, 6 घंटे में 511 जोड़ों के विवाह
बारात का पारंपरिक तरीके से हुआ स्वागत
नपा परिषद द्वारा आयोजित इस विवाह सम्मेलन की खासियत यह रही कि एक साथ सभी दूल्हे बग्घी और घोड़ों पर सवार होकर नपा प्रांगण पहुंचे। जहां नपाध्यक्ष अर्चना गुड्डू सिंह, नगर पालिका के सभी अधिकारियों व पार्षदों ने कन्या पक्ष की भूमिका निभाते हुए शानदार द्वारचार का कार्यक्रम आयोजित किया। वहीं महिलाओं ने सिर पर मंगलकलश रखकर वैवाहिक गीत गाए। बारात चौपाटी स्थल से गाजे-बाजे के साथ उठी और नगर पालिका प्रांगण पहुंची। बारातियों ने पूरे रास्ते में बैंड़ बाजों की धुन पर जमकर नृत्य किया।
20 बेदियों पर पढ़ी गई भावरें
परिसर में वैदिक रीत से विवाह के लिए मंडप सजाया गया था। 20 अग्नि बेदियों पर विवाह हुए। कई बेदियों पर एक साथ 3 से 4 जोड़ों तक की भावंरें पढ़ी गई। एक रश्म को पूरा करने में पंडितों को 15 से 20 मिनट का समय लगा। सामूहिक रूप से भावंरे पढ़े जाने के कारण ही 6 घंटे में 511 विवाह पूरे हो सके।
रश्में पूरे होते ही दहेज उठाकर ले जाते दिखे जोड़े
विवाह की रश्में पूरे होने के बाद पंडितों ने विवाह सम्मन होने की रसीद दूल्हा दुल्हन को दी। इस रसीद के आधार पर नवदंपतियों को दहेज सौंपा गया। कई दूल्हे और दुल्हे उपहार सामग्री वितरण काउंटर से अपने दहेज कंधों पर लादकर ले जाते हुए देखे गए।
वरमाला के लिए लाइनों में लगे दूल्हे
मंच पर एक समय में एक जोड़े ही वरमाला की रश्म हो रही थी। इस कारण बारात के साथ एक साथ पहुंचे दूल्हों को अपनी बारी के लिए इंतजार करने पड़ा। इस कारण कुछ दूल्हों को एक घंटे तक वरमाला के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान दूल्हनें भी समूह मंे इंतजार करती रहीं।