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6 सभापतियों पर भारी पड़ रही अफसरशाही, 3 साल होने के बाद भी नहीं ली एक भी बैठक

3 वर्ष पहले
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संचार संवर्ग समिति: अब तक तीन बैठकें ही हुईं : संचार संवर्ग समिति की बैठक जिला पंचायत में अब तक तीन बार ही हुई है। इसके बाद यह बैठक तीन माह के नियम में न होकर 10 दिन पहले ही हुई, जिसकी जानकारी भी विज्ञप्ति जारी कर नहीं दी गई है। अब यह सभापति का कहना है कि बैठक हुई है। तीन माह में एक बार बैठक बुलाना अनिवार्य है, जो यहां नियम को तब्ज्जो नहीं दिया जा रहा है।

मीडिया की सुनते हैं अधिकारी

बैठक तो 10 दिन पहले ही हुई थी, हमारे द्वारा निर्माण कार्यों की समीक्षा भी की गई। मीडियाकर्मी बैठक में आए, तो अधिकारी सुनेंगे, वैसे तो अफसर किसी की नहीं सुनते हैं। - गोविंद सिंह, सभापति, संचार संवर्ग समिति

उद्योग सहभागिता समिति में आज तक नहीं हुई बैठक

जिला पंचायत में उद्योग सहभागिता समिति बनाई गई है, जिसमें सभापति सहित छह सदस्य शामिल है। सभापति को विभाग का एजेंडा बनाकर विभाग में भेजना होता है, जो इन्होंने नहीं भेजा और आज तक जब से इस बार समिति बनाई गई है, इनके द्वारा कोई भी बैठक समिति की आयोजित नहीं की गई है। उद्योग विभाग में रोजगार और ऋण जैसी अनेकों योजनाएं गरीबों को संचालित होती है, लेकिन जब बैठक हीं नही, तो लाभ दिलाने का सवाल कैसा।

वन समिति: बुंदेलखंड पैकेज में करोड़ों का घोटाला

जिला पंचायत में वन समिति अलग से बनाई गई है, ताकि वन विभाग के सभी कार्यों की समीक्षा समय समय पर होती रहे, लेकिन यहां तो पर अब तक वन समिति की बैठक ही नहीं हुई। जबकि जंगली क्षेत्र है और यहां पर वन विभाग द्वारा कई निर्माण कार्य सहित योजनाएं संचालित की जा रही है, लेकिन सभापति बैठक के लिए आगे नहीं आ रहे है। बुंदेलखंड पैकेज में भी करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर हुआ है। समीक्षा न होने से इस प्रकार ही गड़बड़ी की जा रही है।

सदस्यों की कोई नहीं सुनता

जिला पंचायत में सदस्यों को कोई नहीं पूछता, अध्यक्ष अपने अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। हमने बैठक बुलाने के लिए कई बार पत्र लिखे, लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। अध्यक्ष ने सदस्यों से कोई भी सुझाव आज तक नहीं लिए है। हमारे विभाग में अध्यक्ष सीधे बात करते है और वही सिस्टम जमा लेते है। - रामविशाल पाल, सभापति, वन समिति

कृषि समिति: महज नाम के लिए होती कृषि की बैठक :जिला पंचायत में कृषि स्थायी समिति बनाई गई है, जिसमें सभापति से लेकर सदस्य सभी अपने-अपने क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि है। गांव के किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंच सके और विकास कार्य हो इसके लिए समिति की बैठक आयोजित की जाती है। कई महीनों से जिपं में कृषि समिति की बैठक नहीं हुई, इसके पहले कागजों में ही बैठक संपन्न हो गई।

सभापति स्वयं गर्मी से परेशान

हम बैठक तो करते है, अभी दो-तीन माह से नहीं हुई है। गर्मी ज्यादा पड़ रही, तो ही हमने बैठक नहीं बुलाई। हमारे यहां पर सब ठीक चल रहा है। - मीना/राजा सिंह, सभापति, कृषि स्थायी समिति

स्वास्थ्य एवं महिला बाल

विकास के हाल-बेहाल

जिला पंचायत में स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की एक संयुक्त समिति बनाई गई है, जिसका सभापति भी नियुक्त किया गया है। इसमें पांच सदस्य और भी अलग से शामिल किए गए है, लेकिन सभापति बनने के बाद एक बार तो बैठक हुई है, लेकिन अब तीन साल से स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की कोई बैठक नहीं हुई। जबकि जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं के हाल बेहाल है और अभी आंगनबाड़ी चलो अभियान चलता रहा, जिसमें जनप्रतिनिधि ने पहुंचकर मुआयना नहीं किया।

क्या करें, अधिकारी नहीं सुनते

समिति बनने के बाद एक बार तो बैठक हुई है, लेकिन अब अधिकारी तो बदलते रहे, लेकिन बैठक नहीं की जा रही है। हमारी कोई सुनने वाला भी नहीं है। महिला बाल विकास विभाग सहित स्वास्थ्य विभाग को कई पत्र जारी किए गए, लेकिन बैठक आहूत नहीं की जा रही है और न ही तिथि दी जा रही। - दरबारी कुशवाहा, सभापति, महिला बाल विकास

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