पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • फिल्म व क्विज से 45 घंटे में सिखाए जाएंगे 45 पाठ

फिल्म व क्विज से 45 घंटे में सिखाए जाएंगे 45 पाठ

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जिले की करीब 4 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब नई जानकारियों और नवाचारों से लैस हो सकेंगी। ताकि वह बच्चों को भी नई सूचनाओं और मनोरंजन के नए तरीकों से प्रारंभिक शिक्षा दे सकें। इसके लिए सरकार अब इन कार्यकर्ताओं को जल्द ही जर्मनी की एक संस्था के जरिए ऑन लाइन प्रशिक्षण दिलाएगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार जैन ने बताया कि राज्य सरकार ने जिला सहित पूरे प्रदेश की 1 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नवाचार से लैस करने के लिए जर्मनी की जानी मानी अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्था जीआईजेड के सहयोग से ऑनलाइन पाठ्यक्रम चालू किया है। इसके तहत आंगनबाड़ी शिक्षा नाम से एक वर्चुअल लर्निंग प्लेटफार्म तैयार किया गया है, जिसमें प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक एक साथ मौजूद रहकर लर्निंग व शेयरिंग कर पाएंगी।

ऑनलाइन प्रशिक्षण को 7 माड्यूल व 45 चैप्टर में बांटा गया है। बच्चों की देख, भाल, टीका लगाना, पोषण की जानकारी, कुपोषित बच्चों की देखरेख, आरंभिक शिक्षा, मनोरंजक तरीकों से जानकारियां देना सहित इसमें कई बिंदु शामिल हैं। इन सब तकनीकों को पढ़ाने और सिखाने के लिए फिल्म व क्विज व दूसरे रोचक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस कोर्स की अवधि 45 घंटे है। इसे करने के बाद कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को ऑनलाइन सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।

स्मार्ट प्रशिक्षण

जिले की 4 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर बच्चों को सिखाएंगी नए तरीके

क्या है आंगनबाड़ी शिक्षा प्लेटफार्म

आंगनबाड़ी शिक्षा, असल में लर्निंग का एक साझा प्लेटफार्म है। जिसमें सभी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक अपने-अपने कार्य स्थल पर मौजूद रह कर ही एक समान रूप से आसानी से नवाचार का प्रशिक्षण ले पाएंगी। इसे सरल, मनोरंजक और प्रभावी बनाने के लिए रोचक तथ्‍य जोड़े गए हैं। जिससे सीखने की प्रक्रिया खेल में सीखने जैसी आसान हो जाएगी। साथ ही इसी सरलता से केंद्रों पर आने वाले बच्चों को भी सिखाया जा सके।

लर्निंग प्रोसेस पर पड़ेगा असर

जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय जैन के अनुसार यह समय डिजिटल दुनिया और इंफॉर्मेशन का समय है। इसलिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पास भी इन माध्यमों से पढ़ाने की तकनीक में कौशल और जानकारी होना जरूरी है। इस कोर्स का सीधा व सकारात्मक असर बच्चों की केयर और उनकी लर्निंग प्रोसेस पर पड़ेगा।

खबरें और भी हैं...