नक्सल प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगार वन किशोरों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा उनके जीवन शैली में सुधार लाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास के अंतर्गत सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में वर्ष-2017 चला जा रहा है।
इसके तहत विभिन्न व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित अति दुर्गम क्षेत्रों से 188 पुरुष एवं 96 महिला, कुल-284 वन किशोरोंं ने नामांकन करवाया तथा उपरोक्त 284 में से 103 पुरुष एवं 22 महिला, कुल-125 वन किशोरो ने अपना पाठ्यक्रम उत्तीर्ण किया एवं देश के विभिन्न प्रतिष्ठानों में रोजगार प्राप्त किया। आईटीबीपी बैंगलुरू के उप महानिरीक्षक अशोक कुमार नेगी के मार्गदर्शन एवं 38वीं वाहिनी के सेनानी नरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में 38वीं वाहिनी द्वारा विभिन्न जाति वर्ग यथा अनुसूचित जनजाति के 81, अनुसूचित जाति के 9 एवं अन्य पिछड़े जाति वर्ग के 35 वन किशोर शामिल हैं।
बनाया कॅरियर
आईटीबीपी ने दिया रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास के अंतर्गत की गई पहल
छुरिया. गांव के छात्रों को आईटीबीपी शिविर में कोचिंग देते हुए अधिकारी।
वनांचल के युवा देश की नामी कंपनियों में दे रहे सेवा
इन 125 वन किशोरों को विभिन्न प्रतिष्ठानों यथा एबीएस इलेक्ट्रो प्लेटर प्रा.लि. पुणे, प्राईमा प्रा.लि. पुणे, पाॅइन्टेक पेन्स एंड एनर्जी प्रा.लि. बैंगलुरू, अभिजीत इंडस्ट्रीज प्रा.लि. नासिक एवं पुणे, म्युचुअल इंडस्ट्रीज प्रा.लि. पुणे, टाटा आॅटोकाॅम्प सिस्टम प्रा.लि. पुणे, शीला इंडस्ट्रीज, रायपुर, लूकस टी.वी.एस. लिमिटेड, पुणे, रौंच पाॅलिमर प्रा.लि. पुणे, मिलटेक इंडस्ट्रीज प्रा.लि. पुणे, बी.एस.ए. काॅर्पोरेशन लि. पुणे, विलो पाॅलिमर प्रा.लि. पुणे, टेक्समो इंडस्ट्रीज, कोयम्बटूर, आस्था प्लास्टिक इंडस्ट्रीज सहित अन्य संस्थानों में सम्मानजनक वेतन के साथ नौकरी कर रहे हैं।
आईटीबीपी ने 2017 में शुरू किया था अभियान
वाहिनी द्वारा यह प्रयास वर्ष 2017 में प्रारंभ किया गया था। वाहिनीे ने अपने कार्यक्षेत्र में दूरस्थ इलाकों तक पहुंचकर स्थानीय जनता से संपर्क स्थापित किया तथा शिक्षित बेरोजगार युवा युवतियों को विभिन्न व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में नामांकन की प्रक्रिया तथा पाठ्यक्रम पूर्ण करने के उपरांत रोजगार की गारंटी के बारे में अवगत कराया तथा उनको रायपुर के नामांकन के लिए प्रेरित किया। वाहिनी के प्रयासों से इन वन किशोरों ने उचित मार्गदर्शन पाकर स्वयं को नक्सलवाद की ओर से बचाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल कर लिया हैं। इनसे अन्य युवा भी प्रेरणा ले रहे हैं।