ग्राम घोंघेडबरी। ब्लॉक के उन दस गांवों में शामिल, जहां नल-जल योजना के तहत साढ़े नौ लाख की लागत से पाइप लाइन बिछाई गई। लेकिन जल स्तर में 35 मीटर तक की गिरावट के चलते बोर सूख गए। नल से एक बूंद भी पानी नहीं मिला। योजना फेल होता देख तीन साल से जल संकट झेल रहे ग्रामीणों ने युक्ति लगाई। गांव के किसान तुलेश्वर वर्मा के खेत के बोर से तालाब तक लगभग एक किमी पाइप लाइन बिछाने का प्लान बनाया। इसके लिए गांव भर से चंदा इकट्ठा कर तकरीबन एक लाख रुपए जमा किए। फिर पाइप लाइन बिछने के बाद पहले त ालाब भरा गया ताकि निस्तारी के काम आए। अब इसी पाइप लाइन से पानी मिल रहा है।
साढ़े नौ लाख की नल-जल योजना फेल, एक लाख रुपए चंदा कर बिछाई एक किमी पाइप लाइन, भरा तालाब व सुबह-शाम बुझा रहे गांव की प्यास
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1. सुबह साढ़े चार बजे से इसी तरह पानी भरते हैं घोंघेडबरी के ग्रामीण। बालिकाएं भी पानी ढोती है।
2. तुलेश्वर के खेत से तालाब तक बिछाई है पाइप लाइन से ऐसे कतार लगा लेते हैं पानी।
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23 हजार में भरा तालाब, अब दे रहे 2 हजार रु. बिल
गांव के धर्मेंद्र, गरीबा, प्रभु और मनहरण ने बताया कि पाइप लाइन बिछने के बाद गांव के फंड से 23 हजार रुपए का पानी खरीदकर तालाब भरा गया। अब हर माह बिजली बिल के तकरीबन दो हजार रुपए दे रहे हैं।
समाधान नहीं निकाला
पिछले तीन साल से यही समस्या है। कलेक्टर से लेकर जनप्रतिनिधियों ने समस्या तो सुनी पर समाधान नहीं निकाला। सरपंच पति कुशल वर्मा का कहना है कि गांव में पांच बोर खुदवाए गए, लेकिन एक ही सक्सेस हुआ।
पाइप लाइन बिछाकर समस्या दूर करने का दावा
पीएचई के अफसर दस गांवों में पाइप लाइन बिछाकर समस्या के निदान का दावा कर रहे हैं। घोंघेडबरी, देवारीभाठ, सलगापाठ, सिरसाही, कोटरीछापर, सिंघौरी, खपरीसिरदार, खपरी तेली, जगन्नाथपुर में भी पाइप लाइन का विस्तार किया है।
20 साल पहले भरपूर पानी
गांव के चमरु वर्मा ने बताया कि 20 साल पहले यहां भरपूर पानी था। आश्रित गांव सारंगपुर और चिचोला वाले भी यहां से पानी ले जाते थे। धीरे-धीरे जल संकट गहराता चला गया। अब तो स्थिति भयावह होती जा रही है।