बंद सुशील इनक्लाइन से मिथेन के रिसाव से सांस लेने में परेशानी
चिरकुंडा | बीसीसीएल के सीबी एरिया की बंद खदान से जहरीली गैस के रिसाव से जामदही गांव के लोग दहशत में आ गए हैं। उन्हें डर सताने लगा है कि कहीं पूरा इलाका धंस न जाए। सुशील इनक्लाइन नामक यह भूमिगत खदान चार बर्षों से बंद है। उसके पंखाघर से करीब 15 दिनों से धीरे-धीरे मिथेन गैस रिस रही थी। लेकिन, गुरुवार को हुई बारिश से रिसाव अचानक तेज हो गया है। पंखा घर से धुंए का गुबार उठता ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जहां से गैस रिस रही है, वहीं 500 घरों की बस्ती है। 5 हजार की आबादी को सांस लेने में तकलीफ होने लगी है। गौरतलब है कि चार साल पहले इसी खदान में भयानक हादसा हुआ था।
बीसीसीएल की बंद खदान सुशील इनक्लाइन से निकलती जहरीली गैस।
चार साल पहले हुए हादसे में मारे गए थे चार कर्मी
चार साल पहले सुशील इनक्लाइन में चाल धंस गई थी। इसमें एक अधिकारी और तीन कर्मियों की मौत हो गई थी। तेज आवाज के बाद उत्पादन प्रबंधक अरुप चटर्जी, एसडीएल आॅपरेटर लट्टू साव, ट्राॅमर हरिलाल नोनिया अौर केबल मैन सीताराम मांझी मलबे में दब गए थे। बड़ी मशक्कत से 29 घंटों के बाद शव निकाले जा सके थे।
पास की वृंदावन अंडरग्राउंड खदान पर भी खतरा
जामदही के 500 घरों में भुइयां और मुंडा जातियों के लोग रहते हैं। सुशील इनक्लाइन से करीब आधा किमी दूर वृंदावन अंडरग्राउंड खदान संचालित है। वहां एक शिफ्ट में करीब 400 लोग काम करते हैं। गैस के रिसाव से इस खदान पर भी खतरा है।
बेहद खतरनाक है मिथेन
मिथेन को स्थानीय लोग खुड़नी गैस भी कहते हैं। यह वायुमंडल का तापमान बढ़ा देता है। इसकी अधिकता से इंसानों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, चक्कर आने लगते हैं और मुंह तथा नाकसे खून भी रिसने लगता है। ज्यादा देर तक इस गैस के प्रभाव में रहने पर जान भी जा सकती है।